साइकिल सर्कस में स्टंटः बोरे में बंदकर जमीन में दफनाया, तीन दिन बाद निकाला तो हुआ जीवन का अंत
आपने गांव गांव, मोहल्लों में सात या उससे ज्यादा दिन तक लगातार साइकिल चलाकर करतब दिखाने वाले देखे होंगे। ऐसा स्टंट दिखाने वालों के करतब देखकर हर कोई दांतों तले अंगुली दबा लेता है। इस दौरान इस साइकिल सर्कस का कलाकार साइकिल से अपने पैर कभी जमीन पर नहीं रखता है। यदि वह गिरता भी है या जानबूझकर गिरने का स्वांग करता है तो भी उसके हाथ ही जमीन पर लगते हैं, फिर वह साइकिल उठाकर उस घेरे में चलाने लगता है, जहां उसे लगातार साइकिल चलानी होती है। उसका भोजन, नहाना, कपड़े बदलना आदि सब साइकिल में ही होता है। इस दौरान कई कलाकार सिर के बालों पर रस्सा बांधकर किसी वाहन को खींचते हैं। या फिर अपनी छाती पर भारी पत्थर रखवाकर उस पर हथौड़ा चलवाते हैं। ट्यूबलाइट को तोड़ते हैं, उसे खाने का स्वांग रचते हैं। इस सर्कस के अंतिम दिन सबसे बड़ा खेल ये होता है कि कलाकार को जमीन में दफनाया जाता है। ज्यादातर कलाकार 24 घंटे के लिए जिंदा समाधि लगाते हैं। वहीं, एक कलाकार ने तीन दिन के लिए समाधि लगाई और जब उसे बाहर निकाला गया तो वह मृत अवस्था में मिला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये स्टंट भी दिखाते हैं कलाकार
उल्टी साइकिल चलाना और दांतों से साइकिल उठाना। साइकिल पर खड़े होकर संतुलन बनाना। कलाकार के सीने और पैरों पर मोटरसाइकिल चलाना। सिर पर बोतलें तोड़ना और मुंह में जलता हुआ कोयला रखना। सर्कस के सबसे बड़े और आखिरी आकर्षण के रूप में समाधि के स्टंट को किया जाता है। कलाकार को बोरी में अच्छी तरह बंद करके जमीन के अंदर कब्रनुमा गड्ढे में दफनाया जाता है। निर्धारित समय (जैसे 3 घंटे या अधिक) बीतने के बाद कलाकार को पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाला जाता है, जिसे देखकर दर्शक हैरान रह जाते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
हरियाणा के नूंह में लगा था साइकिल सर्कस
ऐसा खौफनाक मामला हरियाणा के नूंह से सामने आया है। नूंह जिले के तावडू क्षेत्र के खोरी गांव में के एक गांव में पिछले हफ्ते से साइकिल सर्कस लगा हुआ था। इस सर्कस के अंतिम चरण में कलाकार को एक बोरी में बंद कर जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। इसके बाद स्टंट देखने वालों से कहा गया कि जमीन में बंद रहने के बाद भी वह शख्स जिंदा बाहर निकलेगा। हुआ इसका उल्टा। तीन दिन बाद जब 27 वर्षीय कलाकार दीपक नाम के इस कलाकार को बाहर निकाला गया तब तक दम घुटने ने उसकी मौत हो चुकी थी। दीपक फरीदाबाद के गौंछी (बल्लभगढ़) का रहने वाला था और पिछले 10 वर्षों से साइकिल व सर्कस के जोखिम भरे करतब दिखा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पुलिस ने की कार्रवाई
स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए शहीद हसन खान मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ भेज दिया गया। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हैरानी की बात यह है कि स्टंट करने वाले ग्रुप ने शख्स को जमीन में दफना कर वैसे ही छोड़ दिया। स्टंट ग्रुप के दूसरे सदस्यों ने जब जमीन खोदी तो देखा कि उसकी मौत हो चुकी है। कहा जा रहा है कि उसे दफनाने के तीन दिन बाद जमीन खोदी गई थी। हालांकि समय तो लेकर थोड़ा संशय है। दीपक एक ट्रैवलिंग बाइसिकल सर्कस के लिए काम करता था। ऐसा स्टंट गांवों के मेलों में काफी मशहूर है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
करतब बना जानलेवा
जो लोग इस तरह के स्टंट से वाकिफ हैं, उनका कहना है कि जमीन के नीचे जिंदा रहने के लिए सालों की प्रैक्टिस, सांस पर जबरदस्त कंट्रोल और बहुत सावधानी की जरूरत होती है। समाधि लगाने वाले के लिए हवा और पानी का विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके लिए बोरी में छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं। वहीं मिट्टी के अंदर हवा के लिए पतले रास्ते बनाए जाते हैं। फिर भी, परफॉर्मर आम तौर पर कुछ घंटों या या एक दिन तक ही जमीन में बंद रह पाते हैं। कई बार जमीन के भीतर विशैली गैस के चलते पहले भी ऐसे कलाकारों की देश के कई हिस्सों में मौत हो चुकी है। इस खेल में जान का जोखिम बना रहता है। इतने खतरनाक परफॉर्मेंस के बाद भी इसे देखने आए लोगों से एक ग्रुप को ज्यादा से ज्यादा 1 500 से 2,000 रुपये ही मिलते हैं। साथ ही दर्शक कलाकार को भी करतब के दौरान अपनी इच्छानुसार पैसे देते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
हरियाणा में 2017 में भी हुई थी ऐसी ही घटना
यह दुखद घटना 2017 की एक ऐसी ही घटना की याद दिलाती है, जब हरियाणा के पानीपत में एक 17 साल के लड़के की रेत के गड्ढे में ज़मीन के नीचे दबे रहने का स्टंट करने की कोशिश में मौत हो गई थी। यह घटना दिखाती है कि भले ही ऐसे करतब लंबे समय से गाँव के मेलों का हिस्सा रहे हों, लेकिन इनके नतीजे जानलेवा हो सकते हैं। उसे 24 घंटे बाद बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी साँसें थम चुकी थीं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
‘नट’ समुदाय का था दीपक
पुलिस ने बताया कि यह ग्रुप खानाबदोश ‘नट’ समुदाय का था, जिसके कई सदस्य गांवों और छोटे कस्बों में अपनी आजीविका के लिए कलाबाजी और सर्कस जैसे करतबों पर निर्भर रहते हैं। इस मामले में अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि हमें केस करने को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है।
दीपक के भाई ने भी 15 साल तक किया ऐसा स्टंट
दीपक के बड़े भाई सुनेत दाव ने कुछ साल पहले ऐसे ही करतब करना छोड़ दिया था। मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि परिवार ने उन्हें बार-बार ऐसा न करने के लिए कहा था। मैंने खतरे की वजह से इसे छोड़ दिया था। तकनीक के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मेरा भाई लगभग 10 साल से यह करतब कर रहा था इसके लिए प्रैक्टिस की जरूरत होती है। आम तौर पर हम कभी भी 24 घंटे से ज्यादा अंदर नहीं रहते थे। उससे ज्यादा समय खतरनाक हो जाता है। उसे इतने लंबे समय तक अंदर किसने रहने दिया ये स्थानीय लोग ही बता सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
चिकित्सकों का तर्क
चिकित्सकों के मुताबिक, ज़मीन के नीचे बंद जगह में ज़िंदा रहना ऑक्सिजन की उपलब्धता, हवा के आने-जाने की व्यवस्था (वेंटिलेशन), तापमान और नमी जैसी चीज़ों पर निर्भर करता है। जैसे-जैसे ऑक्सीजन का लेवल कम होता है और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती है, इंसान को सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है। वह उलझन में पड़ सकता है और ऑक्सीजन की कमी खतरनाक स्तर तक पहुंचने से पहले ही बेहोश हो सकता है। ध्यान या सांस पर काबू पाने की तकनीकें कुछ देर के लिए कम ऑक्सीजन में सांस लेने में मदद कर सकती हैं, लेकिन वे शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत को खत्म नहीं कर सकतीं। हवा के छोटे रास्ते थोड़ी-बहुत हवा आने-जाने की सुविधा दे सकते हैं, लेकिन जब तक वे ताज़ी हवा की लगातार सप्लाई पक्की नहीं करते, तब तक उनसे लंबे समय तक ज़िंदा रहना मुश्किल है। ऐसे स्टंट में दम घुटने से मौत का बड़ा खतरा होता है और इन्हें कभी नहीं आज़माना चाहिए।
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