दिल्ली में छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के विरोध में देहरादून में एसएफआई ने जुलूस निकालकर किया प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर मंतर से संसद मार्च कर रहे युवाओं और छात्रों पर 20 जुलाई को पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्च के खिलाफ आज 22 जुलाई को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की उत्तराखंड राज्य समिति ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान राजपुर रोड स्थित गांधी पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन में सीटू, जनवादी महिला समिति, छात्र, युवा एवं जनसंगठनों के साथ नागरिकों ने भी भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी लोकतांत्रिक मांगों को रखने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज करना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सीधा हमला है। वक्ताओं ने कहा कि छात्रों की आवाज़ को दमन और हिंसा के माध्यम से दबाने का प्रयास लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर एसएफआई के प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा कि पुलिस की ओर से भाजपा सरकार के इशारे पर साजिशन दिल्ली में छात्रों, युवाओं के प्रदर्शन पर लाठी चार्च किया गया। साथ ही प्रदर्शन को बदनाम करने की साजिश रची गई । छात्र पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और शिक्षा नीति में सुधार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सीटू के जिला सचिव लेखराज ने कहा कि इस तानाशाही सरकार के एजेंडे में सिर्फ लूट और भ्रष्टाचार है। इसका खत्म होना जरूरी है। पंकज क्षेत्री ने कहा कि समस्त विपक्षी ताकतों को एकजुट होकर भाजपा सरकार का विरोध करना होगा। एसएफआई के जिला सचिव अयाज खान ने कहा कि सरकार के मन में चोर है। पहले इनकी अकुशलता के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या की। बाद में इन्होंने छात्रों को साजिशन पिटवाया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मुकुल ने कहा कि देश के छात्र बेहतर और समान शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया तथा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं। उनकी इन जायज़ मांगों का उत्तर लाठियों और दमन से देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक है। सभा के अंत में चेतावनी दी गई कि यदि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और छात्रों की लोकतांत्रिक मांगों की अनदेखी जारी रही, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और प्रशासन की होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ज्ञापन के माध्यम से की गई ये मांग
• संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज एवं बलप्रयोग के आदेश देने वाले अधिकारियों तथा प्रत्यक्ष दोषियों के विरुद्ध स्वतंत्र न्यायिक जांच कर उन्हें शीघ्र दंडित किया जाए।
• शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा दें।
• लाठीचार्ज में घायल छात्रों, पत्रकारों एवं नागरिकों को समुचित आर्थिक सहायता तथा निःशुल्क उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
प्रदर्शन में सुहाना, कनिका कार्तिक , प्रियंका, अफसाना, अशफाक, समीर आयुष, एसएफआई के राज्य सचिव शैलेंद्र परमार, मानवी, अभिषेक, आकाश, जसविंदर, पीयूष, अंजली, सीटू से अभिषेक भंडारी, हिमांशु चौहान, भगवंत सिंह पयाल, अनीता रावत, कुसुम नौडियाल एसएस नेगी, बस्ती बचाओ आंदोलन से अनंत आकाश, महिला समिति से नूरेशा अंसारी, अभिनेत्री बबिता अनंत, डीएवी पीजी कॉलेज छात्र संघ की पूर्व सहसचिव अंजली सेमवाल आदि शामिल रहे।
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