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July 19, 2026

अंकिता को न्याय की लड़ाई और तेज करने का ऐलान, सीएम से मांगा इस्तीफा

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीनों दोषियों की ओर से सजा कम करने और जमानत की मांग का कड़ा विरोध किया गया। मंच ने मांग की कि राज्य सरकार इस मामले में पूरी मजबूती से पैरवी करे और यह सुनिश्चित करे कि दोषियों की सजा किसी भी परिस्थिति में कम न हो तथा उन्हें जमानत न मिले। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मौके पर राज्य आंदोलनकारी निर्मला बिष्ट ने कहा कि 20 जुलाई को न्यायालय में मामले की सुनवाई निर्धारित है, जिसमें तीनों दोषियों द्वारा सजा कम करने और जमानत की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरी मजबूती से पैरवी कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों की सजा कम न हो और उन्हें किसी भी प्रकार की राहत न मिले। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी ओर CBI जांच की धीमी गति गंभीर चिंता का विषय है। उत्तराखंड में रिजॉर्ट संस्कृति, नशे का कारोबार और बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस की नेत्री सुजाता पॉल ने कहा कि पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए इस मामले में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद करना कठिन है। उन्होंने कहा कि मंच लगातार यह सवाल उठा रहा है कि जिन लोगों के नाम कथित VIP एंगल में सामने आए हैं, उनसे अब तक CBI ने पूछताछ क्यों नहीं की। उन्होंने बुलडोजर चलाकर साक्ष्य नष्ट किए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की भी मांग की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुर्सी पर रहते निष्पक्ष जांच नही हो सकती, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया जाना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि जनदबाव के बाद मुख्यमंत्री ने तीन वर्ष पश्चात सीबीआई जांच की घोषणा की, लेकिन अंकिता के माता-पिता द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्र के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने के बजाय एक ऐसे व्यक्ति से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसने इस मामले पर पहले कभी कोई सार्वजनिक भूमिका नहीं निभाई थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शुरू से ही मामले में लीपापोती करने में लगी रही है। उनका कहना था कि छह महीने की सीबीआई जांच के बाद भी किसी ठोस प्रगति का न होना इस आशंका को बल देता है कि जांच को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डालकर कथित वीआईपी अपराधियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उमा भट्ट ने कहा कि 18 सितंबर को अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे। यदि उससे पहले CBI ने जांच पूरी कर दोषियों और कथित VIP एंगल पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। विमला कोली ने कहा कि हत्याकांड में भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका के आरोप सामने आने के कारण राज्य सरकार ने शुरू से ही निष्पक्ष जांच के बजाय मामले को दबाने और आरोपितों को संरक्षण देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और सरकार को इस मामले में जवाबदेह होना होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इप्टा से जुड़े हरिओम पाली ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करना चाहिए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। मंच ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने शुरू से ही इस मामले में आरोपितों को संरक्षण दिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मंच का कहना था कि जब भाजपा पदाधिकारी दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के नाम कथित रूप से वीआईपी के रूप में सामने आए, तब भी सरकार ने उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मंच ने यह भी कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वनंतरा रिज़ॉर्ट पर बुलडोजर चलाने के आदेश दिए थे, इसलिए सबूत नष्ट करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उनका मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा लिया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पद पर बने रहने से जांच प्रभावित होने की आशंका है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मंच ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में 20 जुलाई को उच्च न्यायालय में हत्यारों की सुनवाई से पहले आज नैनीताल में भी बैठक एवं प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें आरोपियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा को मृत्युपर्यंत कारावास में परिवर्तित किए जाने की मांग उठाई गई। प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से मंजू बलोदी, पद्मा गुप्ता, विजया नैथानी, मातेश्वरी रजवार, शांता नेगी, कुंवारा देवी, कृष्णा सकलानी, त्रिलोचन भट्ट, ईश्वर शर्मा, एन राघवेंद्र, मनीष केड़ियाल तथा राजू सिंह शामिल रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) को कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस खुलासे से मची खलबली
फिर नया खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने वीआईपी के नाम को लेकर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस खुलासे के बाद से ही हत्याकांड की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने और वीआईपी सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के साथ ही आम लोग सड़कों पर उतर गए थे। सीएम धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी है। ये संस्तुति एनजीओ चलाने वाले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद की गई। अब लोग सीबीआई जांच की धीमी चाल पर सवाल उठा रहे हैं।
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