शहर के मास्टर प्लान को लेकर जनसुनवाई, देहरादून सिटिजन्स फोरम ने एमडीडीए की सौंपे ज्ञापन, कई बिंदुओं पर दिलाया ध्यान
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से आयोजित देहरादून मास्टर प्लान को लेकर इन दिनों जनसुनवाई चल रही है। इसी के तहत देहरादून सिटिजन्स फोरम ने शहर के भविष्य से जुड़े दो महत्वपूर्ण ज्ञापन एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी को सौंपे। फोरम की तरफ से जगमोहन मेंदिरत्ता, रीतू चटर्जी और अनूप नौटियाल उपस्थित रहे। गौरतलब है कि फोरम शहर के पर्यावरण, यातायात व्यवस्था, आम नागरिकों की सुविधा और सुविधा को लेकर लगातार सक्रिय है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पहले ज्ञापन में देहरादून सिटिजन्स फोरम ने “देहरादून सिटिजन्स एडवाइजरी काउंसिल” के गठन का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि नागरिकों की भागीदारी केवल जनसुनवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके बजाय एमडीडीए के अंतर्गत 11 सदस्यीय स्थायी नागरिक सलाहकार परिषद गठित की जानी चाहिए, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के नागरिक और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हों। यह परिषद समय-समय पर एमडीडीए, नगर निगम, पुलिस एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ बैठक कर शहर के विकास, पर्यावरण संरक्षण, यातायात, कचरा प्रबंधन और शहरी नियोजन से जुड़े विषयों पर रचनात्मक सुझाव दे सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
फोरम का कहना है कि सरकारें, जनप्रतिनिधि और अधिकारी समय-समय पर बदलते रहते हैं, लेकिन शहर के नागरिक ही ऐसे हितधारक हैं जो अपने शहर के साथ पीढ़ियों तक जुड़े रहते हैं। इसलिए शहरी नियोजन प्रक्रिया में नागरिकों की निरंतर, सार्थक और संस्थागत भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इससे विकास योजनाएं अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बन सकेंगी। बंशीधर तिवारी ने सुझाव पर विचार करने का आश्वासन दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दूसरे ज्ञापन में फोरम ने 20 प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए। इनमें शहर में हरित क्षेत्रों और कंक्रीट के बीच संतुलन बनाए रखने, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित एवं सुगम आधारभूत संरचना विकसित करने, प्राकृतिक नालों, जलधाराओं और ड्रेनेज नेटवर्क का संरक्षण करने तथा भूगर्भीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों और फॉल्ट लाइनों के आसपास बहुमंजिला भवनों एवं बड़े निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग शामिल है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
फोरम ने वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, आधुनिक रीसाइक्लिंग सुविधाओं तथा बड़े आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं को स्वीकृति देने से पहले पर्याप्त कचरा प्रबंधन अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके साथ ही वर्षाजल निकासी और सीवरेज प्रणाली की समेकित योजना, शहरी बाढ़ की रोकथाम के लिए व्यापक स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट प्लान तथा बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीति तैयार करने का सुझाव दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि केवल सड़क चौड़ीकरण से यातायात की समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करना, अंतिम छोर तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच सुनिश्चित करना तथा पैदल और साइकिल आधारित परिवहन को बढ़ावा देना आवश्यक है। फोरम ने संकरी सड़कों पर बहुमंजिला इमारतों और बड़े व्यावसायिक परिसरों के निर्माण पर रोक लगाने तथा नई सड़कों और बाईपास परियोजनाओं को स्वीकृति देने से पहले उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, वहन क्षमता और पर्यावरणीय प्रभाव का स्वतंत्र अध्ययन कराने की भी मांग की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
फोरम ने शहर के हरित क्षेत्रों, जंगलों और वन्यजीव गलियारों के संरक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि मालसी, गलजवाड़ी, दुधली सहित अन्य महत्वपूर्ण हरित क्षेत्रों को आपस में पारिस्थितिक गलियारों के माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए ताकि जैव विविधता सुरक्षित रह सके। साथ ही शहरी वृक्षारोपण में स्थानीय हिमालयी प्रजातियों को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देहरादून सिटिजन्स फोरम ने एमडीडीए की ओर से आयोजित जनसुनवाई की पहल का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि फोरम द्वारा प्रस्तुत सुझावों और देहरादून सिटिज़न्स एडवाइजरी काउंसिल के प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा। साथ ही अंतिम मास्टर प्लान में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक शहरी नियोजन और नागरिक सहभागिता को प्राथमिकता दी जाएगी। फोरम ने कहा कि देहरादून की प्राकृतिक पहचान, जल स्रोतों, हरित क्षेत्रों और जीवन गुणवत्ता की रक्षा करते हुए ही एक सुरक्षित, समावेशी और सतत भविष्य का निर्माण संभव है।
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