आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन ने मनाया देशव्यापी काला दिवस, देहरादून में रैली निकालकर जिला मुख्यालय पर किया प्रदर्शन
सीटू से संबद्ध उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन ने देशव्यापी काला दिवस मनाया। इसके तहत जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया गया। साथ ही ज्ञापन भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे गए। देहरादून में यूनियन से जुड़ी आशा कार्यकत्री दीनदयाल पार्क में इकट्ठा हुई और वहां से रैली निकली। रैली तहसील चौक से दून हॉस्पिटल से होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। यहां अपर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपे गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर आयोजित सभा में सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से आशाओं का न तो मानदेय बढ़ाया गया है और ना ही उनका इंसेंटिव बढ़ाया गया। उन्होंने मांग की कि आशाओं को न्यूनतम वेतन 26000 रुपये दिया जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार श्रमिक विरोधी नीतियों लागू कर रही है। इसका भरपूर विरोध किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर सीटू के प्रांतीय कोषाध्यक्ष मनमोहन रौतेला, उपाध्यक्ष भगवंत पयाल, सचिव अभिषेक भंडारी, यूनियन की प्रांतीय उपाध्यक्ष कलावती चन्दोला , महामंत्री लोकेश देवी, जिला अध्यक्ष सुनीता चौहान ने सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के लिए है। प्रदर्शनकारियों में इस अवसर पर नीरज यादव, रतना देवी, सीमा, इन्दु रावत, अनीता भट्ट, आरती बरमोला, रामा, कल्पेश्वरी, सुधा, रजनी गैरोला, मंजू बिष्ट, उषा रावत, हेमलता, मंजू ठाकुर आदि शामिल थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रमुख मांगें
1. संसद में की गई घोषणा के अनुसार मार्च 2025 से बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि का संपूर्ण एरियर सहित तत्काल भुगतान किया जाए। आशा फैसिलिटेटर्स की प्रोत्साहन राशि में भी समान रूप से वृद्धि की जाए।
2. आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स के सभी लंबित भुगतान तुरंत किए जाए। तथा प्रत्येक माह की 7 तारीख तक मासिक भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
3. ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ से संबंधित ₹1,000 प्रतिमाह का भुगतान तत्काल जारी किया जाए।
4. सभी प्रकार की प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) को दोगुना किया जाए।
5. भारतीय श्रम सम्मेलन (Indian Labour Conference) के 45वें एवं 46वें अधिवेशन की आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स से संबंधित सिफारिशों को तत्काल लागू किया जाए। ये सिफारिश निम्नलिखित हैं-
(क) सभी आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स को ग्रेड-III कर्मचारी के रूप में नियमित (Regularize) किया जाए।
(ख) कम-से-कम ₹26,000 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दिया जाए।
(ग) ईएसआई (ESI), ईपीएफ (EPF), ग्रेच्युटी तथा कम-से-कम ₹10,000 प्रतिमाह पेंशन सहित सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान किए जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
6. नियमितीकरण होने तक सभी आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स को निश्चित न्यूनतम वेतन दिया जाए। मूल वेतन (Basic Pay) में वृद्धि कर उसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जोड़ा जाए तथा विभिन्न कार्यों के लिए निर्धारित प्रोत्साहन राशि की प्रत्येक वर्ष समीक्षा एवं संशोधन किया जाए।7. पूरे देश में आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स के लिए समान कार्य-परिस्थितियाँ एवं सेवा शर्तें सुनिश्चित की जाएं।
8. छह माह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश, साथ ही 20 दिन का सवैतनिक आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) तथा चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) प्रदान किया जाए।
9. स्वास्थ्य विभाग में आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स के लिए स्पष्ट पदोन्नति (Promotion) नीति बनाई जाए तथा एएनएम (ANM) भर्ती में उनके लिए आरक्षण/कोटा सुनिश्चित किया जाए।
10. जब तक पेंशन व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक किसी भी आशा वर्कर अथवा फैसिलिटेटर को सेवानिवृत्त न किया जाए। सेवानिवृत्ति नीति बनने तक कम से कम ₹10 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia) दी जाए तथा सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ तत्काल लागू किए जाएँ।
11. ड्यूटी के दौरान आशा वर्करों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH Act) को आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स पर भी पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
12. सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) एवं अस्पतालों में आशा वर्करों के लिए ‘आशा विश्राम कक्ष (ASHA Rest Room)’ की व्यवस्था की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
13. कार्य की सुविधा के लिए सभी आशा वर्करों को स्कूटर उपलब्ध कराया जाए तथा वास्तविक यात्रा व्यय (Travel Expenses) की प्रतिपूर्ति की जाए।
14. पीएमएमवीवाई (PMMVY) योजना के अंतर्गत लंबित सभी प्रोत्साहन राशि का एरियर तुरंत भुगतान किया जाए। योजना में सुधार कर लाभार्थियों को मिलने वाली राशि बढ़ाई जाए।
15. एचपीवी (HPV) वैक्सीन के लिए किसी भी प्रकार का अनिवार्य लक्ष्य (Compulsory Target) आशा वर्करों पर न थोपा जाए।
16. डिजिटलीकरण के लिए सभी आशा वर्करों को उच्च गुणवत्ता वाले 5G टैबलेट, पर्याप्त डेटा पैक तथा समुचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
17. स्वास्थ्य सेवाओं (अस्पतालों सहित) सहित सभी आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSEs) के निजीकरण के प्रस्ताव तत्काल वापस लिए जाए।
18. चारों श्रम संहिताएँ (Labour Codes) एवं उनसे संबंधित नियम वापस लिए जाएँ। ‘श्रम शक्ति नीति-2025’ को निरस्त किया जाए तथा आशा वर्करों एवं फैसिलिटेटर्स को पूर्ण रूप से श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए।
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