रसोई गैस किल्लत के लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदारः नागरिक संगठन
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नागरिक संगठन ने घरेलू तथा व्यावसायिक रसोई गैस की किल्लत के लिए अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर थोपे गए युद्ध को ही जिम्मेदार बताया। साथ ही अमेरिका की निंदा की। पैनिक की स्थिति पैदा ना हो, इसके लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ये विचार संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से देहरादून के रेसकोर्स में आयोजित घरेलू गैस की किल्लत के मूल कारण तथा विश्व शांति, विश्व की समस्याएं और भारतीय विदेश नीति विषय पर संवाद में व्यक्त किए गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा कि इस युद्ध से उपजी बारूद की तपिश हमारे घरों और देश के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंच चुकी है। उपभोक्ताओं को इस संकट का सामना धैर्य से करना होगा। पैनिक स्थिति से पड़ोसियों को भी सावधान करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य होगा। इस तरह के विचार सामाजिक संस्थाओं से जुड़े वरिष्ठ नागरिकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से देश पर थोपी गई टैरिफ नीतियों, देश के विश्वसनीय मित्र रूस से तेल के आयात पर लगाए गए प्रतिबंधों पर आक्रोश जताते हुए इसे हिटलरशाही का उदाहरण बताया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा कि इनका मंतव्य था कि प्रतिबंधों ने भी गैस के संकट को बढ़ाने में योगदान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से रूस से केवल 30 दिन के लिए देश को तेल के आयात की इजाजत देने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश अमेरिका का गुलाम नहीं है। हमारी विदेश नीति संघर्षों की जगह विश्वशांति की समर्थक है। वर्तमान हालातों में भारत को गुटनिरपेक्ष देशों की तीसरी ताकत का नेतृत्व करते हुए युद्धोंमांद के खिलाफ सशक्त आवाज उठानी होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उपभोक्ताओं ने आगामी माह में भारतीय रिफाइनरियों की ओर से रूस से छह करोड़ बैरल तेल खरीदने को देश को संकट से निजात दिलाने वाला कदम बताया। संवाद में क्षेत्रीय खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी संतोष भट्ट भी शामिल हुए। उन्होंने सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयास को लेकर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही दावा किया कि स्थिति सामान्य है। वहीं, लोकसाक्ष्य की ओर से इन दावों को चैलेंज किया जाता है ये सच्चाई नहीं है। इसके उलट लोग परेशान हैं। यदि नहीं, तो हमसे बात करें, हम ढेरों उदाहरण दे देंगे। ऐसे में हम कब तक झूठ की बुनियाद पर टिके रहेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
संवाद में दिनेश भंडारी, गिरीश चंद्र भट्ट, खुशवीर सिंह, ब्रिगेडियर (सेनि) केजी बहल, अवधेश शर्मा, डॉक्टर राकेश डंगवाल, डॉ दिनेश सक्सेना, मेजर एम एस रावत, मुकेश नारायण शर्मा, प्रदीप कुकरेती, सुशील त्यागी आदि भी शामिल थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


