युवा कवयित्री अंजली चंद की कविता- आज कुछ लिखूं
सुनो
आज कुछ लिखूं, इसका ख्याल आया है
तो लिखूं क्या ये ख्याल ही नहीं बन पाया है,
तो सोचा क्यों ना तुम्हें अपने ख्यालों में लाकर
उन ख्यालों से कुछ ख्याल चुराकर
उन्हें शब्दों से बुनकर एक सार दे देते हैं,
थोड़ा तुम थोड़ा मैं को पूरा कर
हम बनने का एक संसार देते हैं, (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
सुनो ना
थोड़ा थोड़ा एक दूजे को जानते हैं
तुम देखो आँखें मेरी और मुझे पढ़ लो
मैं पास तुम्हारे बैठकर खामोशी तुम्हारी पढ़ लूंगी,
मैं हर संघर्ष में साथ तुम्हारा निभाऊंगी
तुम विपदा में नेतृत्व मेरा कर लेना,
माता पिता के बाद स्वाभिमान तुम्हें अपना बना लूंगी
तुम संजोए इसे अपने साथ चल लेना,
जिम्मेदारी दोनों अपनी अपनी पूरी करेंगे
जरूरत में मगर तुम कभी मैं बन जाना (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
कभी मैं तुम बन इठलाऊंगी,
कष्ट एक दूजे को हो
वो आदतें त्याग देंगे,
सपने हर छोटे बड़े संजो कर
साथ में उन्हें पूरा करेंगे,
छोटी गलतियों को नजरंदाज कर
बड़ी गलतियां एक दूजे की बताएंगे ,
ख्याल हो वर्तमान के
हकीक़त में भविष्य बन पाएंगे ?
अधर में अटका है मन
विभोर कलयुग में खुद को सच्चा सौदा दे पाएंगे ?
काल्पनिकता से भरे इस ख्याल के रूप को
वास्तविकता का स्वरूप दे पाएंगे ?
कवयित्री की परिचय
नाम – अंजली चंद
खटीमा, उधमसिंह नगर, उत्तराखंड।
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