जलवायु और साफ हवा पर एक डॉलर का निवेश से 15 डॉलर का फायदा
जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण को अक्सर दो अलग-अलग समस्याओं की तरह देखा जाता है। एक का संबंध तापमान बढ़ने से जोड़ा जाता है और दूसरे का सांस की बीमारियों से। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट कहती है कि दोनों को साथ लेकर काम करने से देशों को पर्यावरणीय फायदे के साथ बड़ा आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये कहती है रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (सीसीएसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण से एक साथ निपटने पर हर एक अमेरिकी डॉलर के निवेश से करीब 15 डॉलर का आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसमें बाजार से मिलने वाले आर्थिक फायदे के साथ उन लाभों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें सीधे पैसे में मापना मुश्किल होता है। जैसे समय से पहले होने वाली मौतों में कमी और बेहतर स्वास्थ्य। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
25 उपायों की पहचान
रिपोर्ट का नाम ‘हिडन एसेट्स: द इकोनॉमिक एंड हेल्थ केस फॉर क्लाइमेट एंड क्लीन एयर एक्शन’ है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के मौके पर जारी किया गया है और यह जलवायु और साफ हवा पर एक साथ कार्रवाई के आर्थिक असर का पहला व्यापक वैश्विक आकलन बताया गया है। रिपोर्ट ने ऐसे 25 उपायों की पहचान की है, जिनसे एक साथ ग्रीनहाउस गैस एमीशन और वायु प्रदूषण दोनों को कम किया जा सकता है। इनमें रिन्यूएबल पावर बढ़ाना, ऊर्जा दक्षता सुधारना, स्वच्छ खाना पकाने और हीटिंग के साधनों का विस्तार, वाहनों के एमीशन और ईंधन दक्षता के मानकों को सख्त करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और जहाजों में कम सल्फर वाले ईंधन का इस्तेमाल शामिल है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इन उपायों को भी किया गया शामिल
इन उपायों का दायरा सिर्फ़ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में उद्योग, परिवहन, कृषि और खाद्य व्यवस्था, घरों में खाना पकाने और हीटिंग तथा कचरा प्रबंधन को भी शामिल किया गया है। मीथेन, ब्लैक कार्बन और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जैसे कम समय तक वातावरण में रहने वाले लेकिन शक्तिशाली प्रदूषकों को कम करना भी इस पैकेज का हिस्सा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये कहते हैं आंकड़े
रिपोर्ट के मुताबिक इन 25 उपायों को लागू करने से मिलने वाला सालाना आर्थिक लाभ 2035 में वैश्विक जीडीपी के 2.8 प्रतिशत, 2050 में 4.5 प्रतिशत और 2100 में 11.4 प्रतिशत के बराबर हो सकता है। तुलना के लिए, 2022 में दुनिया ने फॉसिल फ्यूल पर दी जाने वाली प्रत्यक्ष सब्सिडी पर वैश्विक जीडीपी का 2.18 प्रतिशत खर्च किया था। 2023 में स्वास्थ्य सेवाओं पर वैश्विक खर्च जीडीपी के 9.3 प्रतिशत के बराबर था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देरी से हो सकता है आर्थिक नुकसान
देरी की भी कीमत है। रिपोर्ट का अनुमान है कि कार्रवाई में हर एक साल की देरी से हर साल 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के संयुक्त आर्थिक लाभ का नुकसान हो सकता है। यह वैश्विक जीडीपी के करीब 0.5 प्रतिशत के बराबर है। अगर केवल उन आर्थिक लाभों को गिना जाए जिन्हें बाजार के जरिए सीधे मापा जा सकता है, तब भी तस्वीर कमजोर नहीं पड़ती। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लाभों के आधार पर भी हर एक डॉलर के निवेश पर करीब चार डॉलर का रिटर्न मिल सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये होंगे फायदे
इस गणना में स्वास्थ्य खर्च में कमी, काम करने की क्षमता में बढ़ोतरी और जलवायु से होने वाले भौतिक नुकसान से बचाव जैसे फायदे शामिल हैं। इसके साथ समय से पहले होने वाली मौतों और स्वस्थ जीवन के आर्थिक मूल्य को भी आकलन में जोड़ा गया है। वायु प्रदूषण की मानवीय कीमत इस आर्थिक गणना के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वायु प्रदूषण से हो रहा है नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में मानव गतिविधियों से पैदा होने वाले बाहरी वायु प्रदूषण, खासकर पीएम2.5 और ओजोन, से दुनिया भर में अनुमानित 64 लाख समय से पहले मौतें जुड़ी थीं। घरों के भीतर होने वाले वायु प्रदूषण से इसके अलावा करीब 20 लाख समय से पहले मौतें हुईं, जिनमें लगभग 3 लाख बच्चे शामिल थे। इसी प्रदूषण ने 2025 में बच्चों में करीब 55 लाख नए अस्थमा मामलों और करीब 20 लाख नए डिमेंशिया मामलों में योगदान दिया। रिपोर्ट में दिल का दौरा, फेफड़ों की बीमारियों, मधुमेह, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर के लाखों मामलों का भी जिक्र है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
25 उपाय रोक सकते हैं समय से पहले मौत के मामले
रिपोर्ट के मुताबिक अगर 25 उपायों को पूरी तरह लागू किया जाए, तो 2050 तक वायु प्रदूषण से जुड़ी करीब 14.4 करोड़ समय से पहले होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। इनमें करीब 9.6 करोड़ मौतें बाहरी वायु प्रदूषण से जुड़ी होंगी। इसके अलावा लंबे समय तक रहने वाली बीमारियों के करोड़ों मामलों को भी टाला जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
तापमान में वृद्धि पर भी लग सकती है रोक
इन उपायों का जलवायु पर भी सीधा असर पड़ेगा। रिपोर्ट के आधार पर 2050 तक वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में करीब 50 प्रतिशत, मीथेन उत्सर्जन में 60 प्रतिशत और ब्लैक कार्बन, सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रमुख वायु प्रदूषकों में करीब 70 प्रतिशत कमी आ सकती है। इससे 2050 तक वैश्विक तापमान वृद्धि करीब 0.34°C और 2100 तक करीब 1.4°C तक कम हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक जमीन का तापमान वैश्विक औसत से ज्यादा तेजी से बढ़ता है, इसलिए कई क्षेत्रों में टाली जा सकने वाली गर्मी 2100 तक 1.5 से 2°C तक हो सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
विशेषज्ञ का तर्क
रिपोर्ट के सह अध्यक्ष और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर साइमन डाइट्ज ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण को अलग-अलग देखने से कार्रवाई के फायदे कम आंके जाते हैं। उनके मुताबिक जब दोनों को एक साथ मॉडल किया गया, तो दोनों समस्याओं को अलग-अलग देखने की तुलना में आर्थिक लाभ ज्यादा निकला, क्योंकि दोनों के स्रोत, क्षेत्र और नीतियां अक्सर एक ही हैं। यानी जिस बिजली संयंत्र से कार्बन उत्सर्जन होता है, वह वायु प्रदूषण का स्रोत भी हो सकता है। जिस वाहन से ग्रीनहाउस गैस निकलती है, उससे स्थानीय वायु प्रदूषण भी बढ़ सकता है। इसी तरह कृषि, कचरा और घरों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन से निकलने वाले प्रदूषकों का असर जलवायु और स्वास्थ्य दोनों पर पड़ सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
साफ हवा से आर्थिक लाभ की संभावना
रिपोर्ट की एक और अहम बात यह है कि साफ हवा से मिलने वाले फायदे बहुत दूर की बात नहीं हैं। इसके मुताबिक स्वच्छ हवा से मिलने वाला आर्थिक लाभ एक दशक के भीतर कार्रवाई की लागत से अधिक हो सकता है और 2100 में भी कुल आर्थिक लाभ का करीब आधा हिस्सा साफ हवा से मिलने वाले फायदे से आएगा। इन उपायों को लागू करने में तकनीक से ज्यादा बड़ी अड़चन संस्थागत व्यवस्था हो सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
रिपोर्ट ने बिखरे हुए फैसले, कमजोर अमल क्षमता और सरकारी विभागों के बीच कम समन्वय को प्रमुख बाधाओं में गिना है। इन वजहों से वैश्विक स्तर पर इन उपायों को पूरी तरह लागू करने में करीब आठ साल की देरी हो सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि इन बाधाओं को दूर करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन, बेहतर नियमन और निजी क्षेत्र के लिए अनुकूल नीतियां अपनाई जाएं तो 2040 तक 10 ट्रिलियन डॉलर तक के अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ हासिल किए जा सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वायु प्रदूषण विकास का दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा
यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि लंबे समय से जलवायु कार्रवाई को एक लागत और वायु प्रदूषण को विकास का दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा माना जाता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक साफ हवा विकास, स्वास्थ्य, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा जलवायु स्थिरता के लिए एक आर्थिक संपत्ति है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
भारत के लिए संदेश प्रासंगिक
भारत जैसे देशों के लिए इस रिपोर्ट का संदेश खास तौर पर प्रासंगिक है, जहां वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन दोनों का असर एक साथ दिखाई देता है। हालांकि इस प्रेस रिलीज में भारत के लिए अलग से आर्थिक लाभ, मौतों या उत्सर्जन में कमी के आंकड़े नहीं दिए गए हैं। इसलिए वैश्विक आंकड़ों को भारत पर सीधे लागू करना उचित नहीं होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
फिर भी रिपोर्ट की दिशा साफ है। हवा साफ करने के लिए किए गए कई काम वही हैं जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद करते हैं। रिन्यूएबल पावर, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ खाना पकाना, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और वाहनों के उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण जैसे कदम एक ही समय में स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और जलवायु पर असर डाल सकते हैं। जलवायु कार्रवाई की बहस में अक्सर सवाल पूछा जाता है कि बदलाव के लिए कितना पैसा चाहिए। इस रिपोर्ट का सवाल थोड़ा अलग है। अगर कार्रवाई से मिलने वाला फायदा उसकी लागत से कई गुना ज्यादा हो सकता है, तो देरी की कीमत कितनी बड़ी होगी?
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



