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October 8, 2026

हिम्स जौलीग्रांट में नवजात शिशुओं के ऑक्सीजन सपोर्ट और सीपीएपी पर कार्यशाला, 38 चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने लिया प्रशिक्षण

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के नियोनेटोलॉजी विभाग की ओर से उत्तराखंड नियोनेटोलॉजी सोसायटी के तत्वावधान में उत्तराखंड नियोकॉन-2026 के तहत नवजात शिशुओं के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट और सीपीएपी (सीपीएपी) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नवजात शिशुओं में श्वसन संबंधी जटिलताओं की समय पर पहचान, सुरक्षित ऑक्सीजन उपयोग और प्रभावी श्वसन प्रबंधन के संबंध में हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल को बढ़ाना था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) के स्किल्स एंड सिमुलेशन सेंटर में आयोजित कार्यशाला में एसआरएचयू के प्रति कुलपति डॉ. ए.के. देवराड़ी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि नवजात मृत्यु दर को कम करने में प्रभावी श्वसन प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में कई बार नवजात को आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन दे दी जाती है या सही समय पर सीपीएपी जैसी श्वसन सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती। यह कार्यशाला इसी महत्वपूर्ण गैप को दूर करने का प्रयास है। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड के किसी भी हिस्से में कोई नवजात केवल इसलिए अपना जीवन न गंवाए क्योंकि उसे समय पर उचित श्वसन सहायता नहीं मिल सकी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि नवजात में सांस की तकलीफ को समय रहते पहचानना और उसका उचित प्रबंधन करना बेहद महत्वपूर्ण है। जन्म के बाद का पहला घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है और इस दौरान सही निर्णय नवजात के जीवन के लिए निर्णायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस के प्रति सही दृष्टिकोण और सुरक्षित ऑक्सीजन उपयोग के सिद्धांतों का पालन कर नवजात शिशुओं में गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

नियोनेटोलॉजी विभाग के डॉ. चिन्मय चेतन ने बताया कि कार्यशाला को पूरी तरह हैंड्स-ऑन और प्रैक्टिकल आधारित रखा गया। इसमें 38 डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने प्रतिभाग किया। विशेषज्ञों की टीम ने प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं में श्वसन संकट की पहचान, ऑक्सीजन थेरेपी, सीपीएपी के उचित उपयोग और आधुनिक श्वसन प्रबंधन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यशाला के दौरान इंटरैक्टिव लेक्चर, ओपन डिस्कशन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ प्रतिभागियों के ज्ञान का आकलन करने के लिए कहूट के माध्यम से पोस्ट-टेस्ट भी आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने सुरक्षित ऑक्सीजन उपयोग तथा समय पर उचित श्वसन सहायता उपलब्ध कराने के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों के साथ चर्चा की। कार्यशाला के सफल आयोजन में डॉ. पूनम सिंह, डॉ. भाग्यश्री पी.आर., डॉ. दीक्षा गुप्ता, डॉ. तल्हा रहमान, डॉ. रवलीन कौर, डॉ. नरेंद्र शर्मा एवं अंबिका नेगी ने सहयोग किया।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।