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July 18, 2026

यूकेएसएसएससी परीक्षा घोटालों में कमजोर पैरवी, सीबीआइ जांच जरूरी, तभी मिलेगा प्रदेश के युवाओं को न्यायः लालचंद शर्मा

उत्तराखंड में युकेएसएससी परीक्षा घोटाले के मामले में देहरादून महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि आरोपी तो पकड़े जा रहे हैं, लेकिन न्यायालय में कमजोर पैरवी की जा रही है। नतीजन चार आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई। ऐसे में प्रदेश के युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि राज्य में की गई सारी विवादित भर्तियों की जांच सीबीआइ से कराई जानी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

एक बयान में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड अधिनस्थ चयन सेवा आयोग की पिछले साल हुई भर्तियों में पेपर लीक कराने और परीक्षा पास कराकर सरकारी नौकरी देने के मामले मे अभी तक 41 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें बीजेपी नेता हाकम सिंह को ही मास्टर माइंड बताया दिया गया। वहीं, कांग्रेस के मानना है कि इसमें बड़ी मछलियां शामिल हैं। हाकम सिंह तो मात्र एक मोहरा है। इसी तरह पेयजल निगम, ऊर्जा निगम सहित अन्य विभागों में भी भर्ती घोटालों की बात उजागर होती रही है। ऐसे में यदि सीम पुष्कर सिंह धामी वाकई में धाकड़ धामी हैं तो उन्हें पूरे विवादित मामलों की सीबीआइ से जांच करानी चाहिए। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को पेपर लीक मामले में चार आरोपियों को देहरादून कोर्ट से जमानत मिल गई है। मामले में पंतनगर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त अधिकारी दिनेश चंद्र जोशी समेत चार आरोपितों को जमानत मिली। ऐसे में अन्य आरोपियों के जेल से रिहा होने का रास्ता भी साफ होने लगा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कमजोर पैरवी की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप ही आरोपियों को जमानत के रास्ते खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले के साथ ही अन्य परीक्षाओं और नियुक्तियों में हुई धांधली में सरकार को सीबीआइ जांच करानी चाहिए। कांग्रेस इस मांग को लेकर सरकार पर निरंतर दबाव बनाएगी और प्रदेश के युवाओं को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस तरह एक के बाद एक घोटाले होते रहे उजागर
गौरतलब है कि बेरोजगार संघ के प्रतिनिधिमंडल की ओर से सीएम को शिकायत की गई थी। उन्होंने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से चार और पांच दिसंबर 2021 को आयोजित स्नातक स्तर की परीक्षा में अनियमितता के संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंप कर कार्रवाई की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद डीजीपी अशोक कुमार ने भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर जांच एसटीएफ को सौंपी थी। परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में सबसे पहले उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने छह युवकों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में एक आरोपी से 37.10 लाख रूपये कैश बरामद हुआ। जो उसके द्वारा विभिन्न छात्रों से लिया गया था। इस मामले में अब तक कुल 41 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें बीजेपी नेता भी शामिल है, जिसे पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। परीक्षा भर्ती मामले में अब तक कुल 94.79 लाख कैश बरामद किया है। इसी मामले में दो दर्जन से ज्यादा बैंक अकाउंट फ्रीज लिए जा चुके हैं। जिसमे करीब तीस लाख की राशि जमा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इसके बाद अब हर दिन किसी ना किसी विभाग में भर्ती घोटाला उजागर हो रहा है। साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्षों पर भी बैकडोर से नियुक्ति करने के आरोप लगे। वहीं, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री पर भी ऐसे ही आरोप लग रहे हैं। ऐसे में अब मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरणों की सीबीआइ से जांच कराई जाए, या फिर उच्च न्यायालय के सीटिंग जज की अध्यक्षता में गठित समिति से जांच हो। उधर, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने विधानसभाओं में हुई भर्तियों की जांच को कमेटी गठित कर दी थी। कमेटी की रिपोर्ट के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने बड़ा एक्शन लिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने विधानसभा में 480 में से 228 नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। ये 2012 के बाद से की गई तदर्थ नियुक्तियां हैं। इनमें उपनल से की गई 22 भर्तियां भी रद्द कर दी गईं। इसके साथ ही उन्होंने सचिव मुकेश सिंघल को भी निलंबित कर दिया था। साथ ही कहा गया कि तत्‍कालीन विधानसभा अध्‍यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल की भूमिका की जांच की जाएगी। वहीं बताया गया कि 2012 से पहले हुई नियुक्ति पर विधिक जांच होगी। इसके बाद अब विधानसभा की वर्तमान अध्यक्ष पर भी बाहरी राज्यों के लोगों को अपने निजी स्टाफ में शामिल करने के आरोप लग रहे हैं।