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January 29, 2026

उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव का दावा, कोरोना से लड़ने के लिए राज्य के पास पर्याप्त क्षमता

उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए उत्तराखंड के पास पर्याप्त क्षमता है। जरूरत के साथ ही सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। ये निरंतर जारी है।

उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए उत्तराखंड के पास पर्याप्त क्षमता है। जरूरत के साथ ही सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। ये निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के बाद प्रदेश सरकार की ओर से इसकी रोकथाम के लिए लगातार प्रयास लिए जा रहे हैं।
प्रदेश के सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में साझा प्रेस कॉफ्रेंस में जानकारी दी कि एक अप्रैल 2020 को प्रदेश में 216 आईसीयू बेड थे दो एक साल में बढ़कर 1 अप्रैल 2021 तक 836 आईसीयू बेड हो गए थे। अब इनकी संख्या 1336 हो गयी है। पिछले एक माह में ही करीब 500 आईसीयू बेड बढाए हैं। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2020 को 116 वेंटिलेटर थे, 1 अप्रैल 2021 को प्रदेश में वेंटिलेटर की संख्या 695 थी, जो कि वर्तमान में 842 पहुँच चुकी है।
सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि 1 अप्रैल 2020 को ऑक्सीजन बैड 673 थे, 1 अप्रैल 2021 को ऑक्सीजन बेड की संख्या 3535 थी। आज इनकी संख्या 6002 पहुँच चुकी है। अर्थात पिछले एक माह में लगभग 2500 आक्सीजन बेड बढाए गये हैं।
सचिव नेगी ने बताया कि 1 अप्रैल 2020 को प्रदेश में ऑक्सीजन की खपत 8 मेट्रिक टन थी, जबकि 1 अप्रैल 2021 को प्रदेश में ऑक्सीजन की खपत 15-20 मेट्रिक टन तक बढ़ गई। वर्तमान में 100 मेट्रिक टन के करीब ऑक्सीजन की खपत है। सचिव जैसे-जैसे ऑक्सीजन बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी, ऑक्सीजन की खपत भी बढ़ेगी। हमारे पास इसकी पर्याप्त क्षमता है।
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने बताया कि प्रदेश में 1 अप्रैल 2020 को टाइप बी ऑक्सीजन सिलेंडर 1193 मौजूद थे, जबकि वर्तमान में सिलेंडर की संख्या 9917 पहुँच गई है। उन्होंने बताया कि यह सभी सिलेंडर अलग-अलग अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 1 अप्रैल 2020 को ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर्स 275 थे, जो 1 अप्रैल 2021 को 1275 हो गये और वर्तमान में 3275 हैं।
1 अप्रैल 2020 को सिर्फ श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के पास अपना ऑक्सीजन प्लांट था, जबकि 1 अप्रैल 2021 से मेला हॉस्पिटल हरिद्वार में था। वर्तमान में 6 जगह हो गया है। जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग, जिला अस्पताल रुद्रपुर, हेमवती नंदन बहुगुणा अस्पताल हरिद्वार, बेस हॉस्पिटल हल्द्वानी में भी ऑक्सीजन प्लांट संचालित हो रहा है। इन सभी प्लांट से 2330 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की क्षमता सृजित कर ली है।
सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि प्रदेश में 9 ऐसे स्थान हैं जहां ऑक्सीजन प्लांट जल्द लग जाएँगे। जिनमें मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल चमोली, एसडीएच नरेंद्र नगर, जिला अस्पताल अल्मोड़ा, जिला अस्पताल चंपावत, जिला अस्पताल उत्तरकाशी, जिला अस्पताल पिथौरागढ़ शामिल है।
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने बताया कि प्रदेश में 13200 रेमेडीसिविर इंजेक्शन लाए जा चुके हैं, जिसमें 2 बार स्टेट प्लेन के माध्यम से अहमदाबाद से इंजेक्शन मंगवाए गए हैं। सचिव अमित नेगी ने कहा कि सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है। जनता का सहयोग भी बहुत जरूरी है। कोविड के प्रोटोकॉल का पालन करें। लोग काफी जागरूक भी हुए हैं।
कालाबाजारी को लेकर उठा रहे कदम
वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में आइजी अमित सिन्हा ने दवाओं की कालाबाजारी को लेकर की जा रही कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की ओर से कालाबाजारी रोकने के लिए 112 टोल फ्री नंबर पर भी शिकायत की व्यवस्था की गई है । बीते 2 दिन में 147 शिकायतें पुलिस टीम को प्राप्त हुई है, जिसके बाद पुलिस टीम द्वारा पल्स ऑक्सीमीटर की ओवर रेटिंग के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि पल्स ऑक्सीमीटर जीवन रक्षक दवा एवं हॉस्पिटल बेड की कालाबाजारी को लेकर कोई बात सामने आती है तो जल्द उन्हें पकड़ लिया जाएगा। आईजी सिन्हा ने बताया कि पुलिस मास्क ना पहन ने वालों के चालान की कारवाई कर रही है। हालांकि लोगों में काफी जागरूकता आई है।
किए जा रहे हैं फो कॉल्स
वहीं होम आइसोलेशन एवं कांटेक्ट ट्रेसिंग संबंधित जानकारी देते हुए डीआईजी एसडीआरएफ रिधिम अग्रवाल ने बताया कि एसडीआरएफ की ओर से होम आइसोलेशन में रहने वाले सभी लोगों को फोन कॉल्स किए जा रहे हैं। बीते 6 दिन में लगभग 26 हजार लोग होम आइसोलेशन में रह रहे थे। एसडीआरएफ की टीम रोजाना लगभग पांच हजार फोन कॉल करती है। उन्होंने बताया कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत सामने आती है तो उनकी संबंधित डॉक्टरों से बात भी कराई जा रही है। बीते 2 दिन में 600 से ज्यादा मरीजों की डॉक्टरों से मरीजों की बात कराई जा रही है।

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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