यूकेडी ने किया मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ का गठन, लूशुन टोडरिया बने अध्यक्ष, राजनीति महत्वकांक्षा या फिर
भूमिका
छह माह या साल भर प्रदर्शन करो, उस दौरान बोलो कि हम राजनीतिक दल से संबंधित नहीं है। फिर किसी चुनाव से ऐन पहले किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाओ। टिकट भी पा लो। ऐसी उत्तराखंड किसी ज्वलंत मुद्दों को लेकर हुए आंदोलनों की नियति बन गई है। युवाओं ने मूल निवास – भू कानून समन्वय संघर्ष समिति का गठन कर मूल निवास (1950) और सशक्त भू-कानून की मांग को लेकर आंदोलन आंदोलन किया तो आमजन भी इस आंदोलन से जुड़ने लगे। विभिन्न राजनीतिक संगठनों और समाजिक संगठनों ने इस मंच को इसलिए समर्थन दिया कि इससे जुड़े युवा संगठन को गैर राजनीतिक बताते रहे। अब वर्ष 2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक महत्वकांक्षा के चलते कई संघर्ष समिति के पदाधिकारी विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़ने लगे। ऐसे में समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने 15 मार्च को समिति की कार्यकारिणी भंग करने की घोषणा की। साथ ही कहा कि जो भी समिति गैरराजनीतिक संगठन है। ये जनसहभागिता से चलाया जा रहा है। कुछ पदाधिकारी दूसरे राजनीतिक दलों से भी जुड़ रहे हैं। ऐसे में कार्यकारिणी को भंग किया जा रहा है। नई कार्यकारिणी का गठन शीघ्र होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यूकेडी का भी रहा मूल निवास मुद्दा
उत्तराखंड क्रांति दल राज्य आंदोलन के दौरान से ही मूल निवास और भू कानून के मुद्दे को लेकर सक्रिय रही। उत्तराखंड राज्य का गठन होने के बाद जब यूकेडी ने चुनावों में प्रत्याशी उतारे तो इस दल को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। चुनावों में यूकेडी के कुछ एक विधायक बने, लेकिन वे भी सत्ताधारी दल की गोद में जाकर बैठ गए। ऐसे में सरकार में शामिल होने के चलते इस दल के विधायक सवाल पूछना ही भूल गए। ऐसे में धीरे धीरे दल का चुनाव में सूपड़ा साफ होने लगा। अब एक बार फिर से यूकेडी चुनाव से पहले संगठित होकर अपनी पहचान को लौटाने के लिए प्रयास कर रही है। कई बार चुनाव के दौरान यूकेडी के दो फाड़ भी हुए और फिर चुनाव के बाद दोनों धड़े एक होने का ड्रामा भी चलता रहा। ऐसी घटनाओं ने इस आंदोलनकारी दल को हाशिए में डाल दिया। हालांकि, एक बार फिर से दल को मजबूत करने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उक्रांद ने बनाया मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ
उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने मूल निवास भू कानून के मुद्दे की लड़ाई जनता के बीच ले जाने के लिए मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ का गठन कर दिया है। यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने मूल निवास भू कानून आंदोलन की अगुवाई करने वाले लूशुन टोडरिया को इस प्रकोष्ठ का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यहां गौरतलब है कि लूशुन टोडरिया मूल निवास – भू कानून समन्वय संघर्ष समिति से जुड़े रहे। हालांकि, उन्होंने यूकेडी में शामिल होने से पहले समिति से इस्तीफा दिया या नहीं, ये हमें पता नहीं। क्योंकी समिति के मीडिया ग्रुप में वह वर्तमान में भी एडमिन के पैनल में हैं। हालांकि, राजनीति में प्रवेश करने का सभी को अधिकार है। हम भी उन्हें राजनीतिक पारी खेलने की शुरुआत करने की बधाई देते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इन पदाधिकारियों ने दी सूचना
देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष सुनील कोटनाला एवं मुख्य प्रवक्ता एवं केंद्रीय उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट ने मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ के गठन की सूचना मीडिया को दी। केंद्रीय उपाध्यक्ष सुनील कोटनाला ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल मूल निवास भू कानून के मुद्दे पर हमेशा प्रमुखता से मुखर रहा है। यूकेडी ने मूल निवास भू कानून पर हमेशा से अपना रुख स्पष्ट रखा है। इसी को देखते हुए आज मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ का भी गठन कर के इस लड़ाई को तेज करने का निर्णय लिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
केंद्रीय उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल प्रदेश भर में आंदोलन करने वाले युवाओं को नेतृत्व प्रदान कर रहा है। इसी क्रम में मूल निवास भू कानून आंदोलन का नेतृत्व करने वाले युवा लूशुन टोडरिया को मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अब उत्तराखंड क्रांति दल मूल निवास भू कानून की लड़ाई आर पार की रणनीति के साथ लड़ेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर लूशुन टोडरियाने शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल ने हमेशा से भू कानून और मूल निवास के मुद्दे पर मजबूती से लड़ाई लड़ी और राज्य आंदोलन के दौरान से ही उत्तराखंड की जमीन बचाने की बात कही थी। यह उत्तराखंड क्रांति दल के शीर्ष नेतृत्व की मूल निवास भू कानून के मुद्दे के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है कि उन्होंने अलग से मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ का गठन किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
टोडरिया ने कहा कि अब मूल निवास भू कानून की लड़ाई विशुद्ध रूप से राजनीतिक तरीके से लड़े जाने का समय है। जब विधानसभा चुनाव आने वाले हैं तो इस समय गैर राजनीतिक आंदोलन सीधा सीधा भाजपा को फायदा पहुंचाएगा। इसलिए इस समय मूल निवास भू कानून का आंदोलन उत्तराखंड क्रांति दल के झंडे के नीचे लड़े जाने की आवश्यकता है। जल्द ही इस प्रकोष्ठ की कार्यकारिणी का विस्तार किया जाएगा और प्रदेश भर में उत्तराखंड क्रांति दल के नेतृत्व में मूल निवास भू कानून के मुद्दे पर जनता को लामबंद किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रेस वार्ता में ओबीसी प्रकोष्ठ यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष पंकज पैन्यूली, राकेश नेगी, महानगर युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष जतिन चौहान, कार्यकारी अध्यक्ष पौड़ी दीप्ति, कनिष्क जोशी, पंकज तिवारी आदि मौजूद रहे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


