भाजपा में टिकट के दावेदारों ने भी अपने पोस्टरों से गायब किया त्रिवेंद्र को, आखिर कितनी बड़ी खता की थी त्रिवेंद्र ने
उत्तराखंड में छह माह के भीतर भाजपा ने दो बार मुख्यमंत्री तो बदले, लेकिन अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इनमें त्रिवेंद्र सिंह रावत ने क्या खता की थी। जिसे छिपाने में भाजपा नेतृत्व कामयाब रहा।
उत्तराखंड में छह माह के भीतर भाजपा ने दो बार मुख्यमंत्री तो बदले, लेकिन अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इनमें त्रिवेंद्र सिंह रावत ने क्या खता की थी। जिसे छिपाने में भाजपा नेतृत्व कामयाब रहा। अब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुद को अपने स्तर पर सक्रिय किया है, लेकिन संगठन के लोग उन्हें दरकिनार करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में ये भी अंदेशा है कि आखिरकार त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जो गलतियां की, वो शायद कुछ ज्यादा ही बड़ी हैं। इसी कारण उनके नाम से भी भाजपा के टिकट के दावेदार परहेज कर रहे हैं।ये था राजनीतिक घटनाक्रम
गौरतलब है कि मार्च माह में विधानसभा के गैरसैंण में आयोजित सत्र को अचानक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। तत्कालीन सीएम सहित समस्त विधायकों को देहरादून तलब किया गया था। छह मार्च को भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक वरिष्ठ भाजपा नेता व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह देहरादून आए थे। उन्होंने भाजपा कोर कमेटी की बैठक के बाद फीडबैक लिया था। इसके बाद उत्तराखंड में आगामी चुनावों के मद्देनजर मुख्यमंत्री बदलने का फैसला केंद्रीय नेताओं ने लिया था। इसके बाद नौ मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं, दस मार्च को भाजपा की विधानमंडल दल की बैठक में तीरथ सिंह रावत को नया नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल के पास जाकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। दस मार्च की शाम चार बजे उन्होंने एक सादे समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।
दो माह बाद ही तत्कालीन सीएम तीरथ सिंह रावत 30 जून को दिल्ली के लिए रवाना हुए और इसके साथ ही उनके इस्तीफे की चर्चाओं ने जोर पकड़ा। वह दिल्ली से वापस लौटे और उन्होंने दो जुलाई की देर रात राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बाद पुष्कर सिंह धामी को विधायक दल का नेता बनाया गया और उन्होंने चार जुलाई को सीएम की शपथ ली। इनमें तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के पीछे की वजह संवैधानिक संकट को बताया गया। क्योंकि वह पौड़ी से सांसद हैं और सीएम पद पर आसीन होने के छह माह के भीतर उन्हें चुनाव लड़ना था। कोरोना की दूसरी लहर के चलते उत्तराखंड में चुनाव संभव नहीं थे। वहीं, त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाने के पीछे की कोई वजह तक नहीं बताई गई। उन्हें चार साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले ही हटा दिया गया था, जबकि इसके लिए उन्होंने बड़े आयोजन की तैयारी कर रखी थी। ऐसे में सवाल उठने लाजमी भी हैं।
टिकट के दावेदारों ने किया त्रिवेंद्र से किनारा
अब स्थिति ये है कि भाजपा में टिकट के दावेदारों ने त्रिवेंद्र सिंह रावत से किनारा करना शुरू कर दिया है। जो नेता जहां से टिकट की दावेदारी कर रहा है, वह सोशल मीडिया में पोस्टर तैयार कर डाल रहा है। ऐसे त्रिवेंद्र को छोड़कर अमूमन सभी भाजपा नेताओं की फोटो लगाई जा रही है। अब भाजपा के उत्तराखंड मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने भी यमुनोत्री विधानसभा सीट से दावेदारी को लेकर सोशल मीडिया में पोस्टर जारी किया है। इसमें उन्होंने लिखा है-केंद्र में मोदी, उत्तराखंड में भाजपा। मिशन 2022। भाजपा कालिंदी मंडल (यमुनोत्री) की ओर जारी पोस्टर में लिखा गया कि यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र से आपकी सेवा में तत्पर। इस पोस्टर में त्रिवेंद्र सिंह रावत को तवज्जो नहीं दी गई। वहीं, पूर्व सीएम मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चंद्र खंडूड़ी की फोटो भी गायब है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐसी कौन सी बड़ी गलती कर रखी है, जिसे न तो भाजपा सामने आई और न ही उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में आगे किया जा रहा है।



