पंचायत ने किया दो पत्नियों के बीच पति का बंटवारा, साथ रहने के दिन किए तय, इस दिन रहेगा पति का साप्ताहिक अवकाश
प्रतिकात्मक फोटो
पति पत्नी और वो के बीच विवाद अक्सर चर्चा में रहते हैं। यहां तो दो दो पत्नियों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि दोनों की पत्नियां पति पर दावा करने लगीं। हर दिन होने वाले विवाद के समाधान को लेकर पंचायत की शरण ली गई और पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया कि उसे तीनों पक्ष ने खुशी खुशी स्वीकार कर लिया। दो पत्नियों के बीच रोज़ाना होने वाले झगड़ों से परेशान पति के लिए गांव की पंचायत ने ‘साप्ताहिक बंटवारे’ का फैसला सुना दिया। पत्नियों के साथ रहने के उसके सप्ताह में अलग अलग दिन तय कर दिए गए। साथ ही एक दिन पति को साप्ताहिक अवकाश भी दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ऐसा मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आया है। इसकी चर्चा पूरी जिले में हो रही है। अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया आकिल गांव में एक मुस्लिम युवक दो पत्नियों के साथ रहता है। युवक की पहली शादी अरेंज और दूसरी लव मैरिज है। दोनों पत्नियों में पति को साथ रखने को लेकर अक्सर विवाद होता रहता था। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस ने गांव के बुजुर्गों को इसको हल करने के लिए कहा। मामला सुलझाने के लिए गांव में पंचायत बुलाई गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पंचायत में पति और उसकी दोनों पत्नियां पहुंचीं। यहां पर पति और उसकी दोनों पत्नियों की बात सुनी गई। इसके बाद बीच का रास्ता निकाला गया। पंचायत ने फैसला लिया कि सप्ताह के पहले तीन दिन सोमवार, मंगलवार, बुधवार को पति पहली पत्नी के साथ पति रहेगा। वहीं, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को पति दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। इसके अलावा रविवार को पति का अवकाश रहेगा। इस दिन पति कहीं दूर एकांत में रह सकता है या अपनी मर्जी से जहां चाहे। पंचों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी विशेष परिस्थिति में आपसी सहमति से एक दिन आगे-पीछे किया जा सकता है। भविष्य में किसी तरह के विवाद से बचने के लिए इस समझौते पर पति और दोनों पत्नियों के हस्ताक्षर कराए गए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
समझौते के अनुसार पंचायत का फैसला
सोमवार, मंगलवार और बुधवार — पहली पत्नी के साथ
गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार — दूसरी पत्नी के साथ
रविवार — पति का निजी अवकाश, दोनों से दूर रहने का दिन। या अपनी मर्जी का मालिक होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पहले भी सामने आ चुके हैं इस तरह के कई मामले
गौरतलब है कि ऐसा ही एक मामला पिछले साल फरवरी में बिहार के पूर्णिया जिले से भी सामने आया था। वहां एक व्यक्ति ने पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली थी। विवाद बढ़ने पर मामला पुलिस परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंचा, जहां समाधान के तौर पर पति के सप्ताह के दिनों का बंटवारा तय किया गया था। उस मामले में भी पति को एक दिन का ‘अवकाश’ दिया गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पिछले साल जनवरी में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित बागपत कोतवाली में इसी तरह एक महिला शिकायत लेकर पहुंची। उसने कोतवाल हरीश भदौरिया को बताया था कि वह वह सात माह की गर्भवती है और पति दूसरी महिला के साथ रह रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने सबको थाने बुलाया। डॉक्टर पति को साथ रखने के लिए दोनों महिलाएं थाने में ही भिड़ गईं। जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की तो दोनों ने समझौता करने की बात कही। काफी देर बातचीत के बाद दोनों पत्नियों ने आपसी सहमति से एक समझौता लिखकर दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसमें तय हुआ कि डॉक्टर पति दोनों पत्नियों के साथ तीन-तीन दिन बिताएगा। ये भी तय हुआ कि पति एक दिन मां के साथ बिताएगा। साथ ही पुलिस ने ये भी हिदायत दी कि दोनों पत्नियां एक दूसरे से सोशल मीडिया पर भी झगड़ा नहीं करेंगी। अब रामपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि ग्रामीण इलाकों में पंचायतें अब भी घरेलू विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभा रही हैं, भले ही उनके फैसले कितने ही अनोखे क्यों न हों।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



