समय मिले यदि साथी तुमको नववर्ष के अरुणोदय को, नाना नातिन उत्सुक हैं। देख रहें हैं नया सबेरा, देखो...
poetry
कहने को है नया, लेकिन नया कुछ भी नही। तारीख़ बदली,साल बदला और बदला कुछ भी नही।। बदलने को सब...
तुम जैसे --- तुम जैसे - पुष्पों में सुगंध । तुम जैसे - कुंजों में बहार । तुम जैसे -...
आ जाना मेरे सुर कुट पर क्या देखा है कभी आपने, मां के मंदिर की यह शोभा ! हरित बर्फीला...
सर्दी डर रही है हर गली चौराहे पर, चाय की थडियों पर, विद्यालयों के प्रांगण में, मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों में,...
इस चमकीली दुनिया से अच्छा तो बिस्तर पर मरने से अच्छा, तो सरहद पर ही मरना था, पर भाग्य में...
यह साल जा रहा है आने वालों के लिए जगह छोड़ता हुआ वह है ही हजारो साल जैसा वक्त की...
सिर्फ कहने मात्र की आजादी है आज भी एक स्त्री को। उसे आज भी उन्हीं बेड़ियों में बांधकर मजबूर बनाया...
संघर्ष ये जो चमक रहा है हमारे नाम का सितारा, कभी हम भी थे बिखरी हुई धूल से। मेरे जानने...
पर्यावरण की रक्षा खातिर ऐ तथाकथित विकासवादियों ! मां का सीना मत चीरो। भोग बिलास लिप्सा खातिर ,जख्म धरा पर...
