मृत्यु का यह मुख्यद्वार मुबारक यह चुनावी त्योहार मुबारक। यह ज़हरीली फुहार मुबारक मेरी इक इक साँसो का होता। तुमको...
poetry
महाकाल कोरोना आया, सर पर मंडराया मौत का साया ! सवा तीन लाख आज संक्रमित, समय नहीं होने का भ्रमित।...
बाहर कोरोना कातिल खड़ा है वजह क्या है, बाहर निकलने की, विक्षिप्त कातिल बाहर खड़ा है। जरूरत क्या,कातिल से मिलने...
काली चादर उर में न जानें आज, छाया क्यों। तम जैसे काली चादर ओढ़े। दिशा दिशा बिखरी है क्यों, तम...
जिंदगी वतन के नाम क्या है इंसान बता, तेरी ये जिंदगी, जो काम ना आए वतन के। मौके तो बहुत...
महानायक भीमराव अंबेडकर चलो आज सुनाएं बात जुबानी, महू मध्यप्रदेश की ये,है कहानी। पैदा होगा ऐसा लाल धरा में, गजब...
मेरी पीड़ा नहीं कठोर हृदय लिए खड़ा हूं, मेरे हृदय में भी, भरी नमी है। दुःख बोल नहीं सकता अपना,...
चन्द्र कुंवर की याद में मेरी इच्छा जी सकूं इस संसार में जब तक। महक बिखेरता चारों ओर मैं जाऊं...
थोड़े से गम हैं हिस्से में अगर, खुशियां भी आएंगी कभी थोड़े गहरे से जख्म है मगर ये लाइलाज़ तो...
लम्हें दुःख भरे 2013 की आपदा केदारनाथ की, वो मंजर भी हम सबने देखा। 2020 का जैसा मंजर, शायद पहले...
