प्रणय स्वप्न कमल-नयन का सुख-स्वप्न पुष्प छू लिया, अन्तर्मन, हर सुरों में गंध बसा है पुलकिल होंठ अपावन। जीवन का...
Literature
क्यों गांव से दूरियां हो गई अब तो कोई चहल पहल नहीं गांवों में, जैसे पहले हुआ करती होगी। आ...
कबि-कबि कबि-कबि एक-हैंका धोऽर, आंद-जांद रावा. अपड़ि खैरी-खुशि-बिपत, सब्यूं सुणांद रावा.. ज्यू हळ्कु ह्वे जांद, सूणीं-सुणैकी क्वी बात, कबि अपणौं,...
हम गांव क्यों भूल गए आखिर क्यों शहर की,रंगीनियों में, हम यूं ही मशगूल हो गए। पुरुखों का घर था...
शिक्षक बच्चों को समझे पौध समान तब सींचे उसको अपने ज्ञान से प्यार प्रेम से बच्चों को पढ़ाये तब वह...
पर्यावरण दिवस मना तो रहे आज पर क्या सुरक्षित है यहां पर्यावरण फिर क्यों चारों और ऑक्सीजन की कमी, क्यों...
वृक्ष जन-जीवन का आधार पर्यावरण होता जिससे साकार शुद्ध वायु की होती जिसमें भरमार अरण्य का जिससे होता विस्तार वृक्ष...
आओ हम सब मिलकर वृक्ष लगायें प्रगति के नाम पर आज प्राकृतिक संसाधन नष्ट कर रहे है बनाये जा रहे...
घर एक गांव में भी बनाया करो यूं अपनों की जमीन छोड़कर, शहर मत जाया करो। कब छोड़ना पड़े शहर,...
सेवा करने से ईश्वर प्रसन्न होता है सेवा करने से जीवन सफल होता है, सेवा करने से कर्तव्यनिष्ठा बढ़ती है,...
