अगोड़ि-पिछोड़ि इन्सान कु नाता-इन्सानियत से, अगोड़ि च. हमरु स्वार्थ-हमरु दुखड़ा, सब पिछोड़ि च.. कबि- नि रैंदू एक जगा, यो- चंचल...
Literature
माटी पुष्प, अश्रु, नारी की कहानी हे! माटी तेरी भी क्या अजब कहानी, धरती पर ही तुझको हरियाली लानी। कितना...
साहित्यिक संस्था रुद्रपुर बुलंदी जज्बात ए कलम की ओर से 11 जुलाई से मैराथन कवि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा...
"हौसला" तन पर कफ़न बांधे, क्यों वो घर से चल पड़ा है। ना रहे घर में कोई भूखा, सड़क पर...
मुन्ना रावत गजब कु साहस भोर्यूं , तेरा ज्यू- ज्यान भुला. अपड़ा घर बार दगड़, रख अपणु ध्यान भुला.. बालमसिंह...
"मेरे पौधे" न जानें मेरे पौधे ही, क्यों मुझको अच्छे लगते हैं। हवा के झोंके से जब वे हिलते, मन...
अस्तित्व पहाड़ का पानी यहां की जवानी अपने अस्तित्व को लेकर अभी भी तरस रही है क्योंकि- पहाड़ ने कभी...
कब तक खुद को समझाएंगे। ऐसे तो हम मर जाएंगे।। झूठे ख्वाबों से यारो हम। यूं कब तक मन बहलाएंगे।।...
लग रहा बसंत सा लग रहा मृदुल बसंत सा, परिंदों का गुंजन मेरे वन में। दिशाएं सभी महक रही, कलियां...
दु-मुख्या वेन त बड़ै हमु- सबु, बरोबर इक-नसि यख. हमन बड़ै दे वेकि या, धरोहर कन-नसि यख.. क्वी बढ अगनै-क्वी...
