फागुन आई गयो हो... फागुन आई गयो हो... फागुन आई गयो होली छाय रही... फागुन आई... चैत्र मास तुम घर...
Literature
पहाड़ी गीतमाला फाल्गुनी फुहार को लोकगीतों का संग्रह भी कहा जा सकता है। इनमें कुछ गीत को लेखक की ओर...
मेरे डांडो - कांठों में आजकल सुरभित पुष्प खिले हैं। बांज बुरांश मौरू तरुवर, शांत स्निग्ध हरितपर्ण धरे हैं। प्रिय...
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में काली कुमाऊं के पाटी विकासखंड में एक अनोखी पारंपरिक प्रथा बेट अभी भी कायम है।...
यार फकीरी में मजा है.... यार फकीरी में मेरे दिलss मेरे दिलss मेरे दिल मेरे दिल मेरे दिल यार फकीरी...
छुट्टी का दिन था। दोपहर को रोहित पड़ोस के घर में अपने दोस्त रजत के साथ खेलने गया था। कुछ...
बगत सरकणूं च मठु - मठू करि बगत, सर्- सरकणूं च. तवा म धरीं रोटि सि, फर्- फरकणूं च.. जैं...
बेटियाँ कुंपळौं तैं तुम खिलण द्यावा, खुशबू बणी फैलण द्यावा। बन्द करा अब यों कि हत्या, जीवन जोत जगण द्यावा।।...
भिलंगना और भागीरथी के संगम पर पुराण प्रसिद्ध तीर्थ नगरी टिहरी कभी गणेश प्रयाग के नाम से जानी जाती रही,...
लेखक ने करीब 60-62 वर्ष पूर्व बच्चों की पत्रिका "चन्दामामा" में एक कहानी पढ़ी थी। लेखक का नाम याद नहीं।...
