हे प्रभु तू ही तू मन्खी ज्यूम - कन रिटदी, कतगै बानी - गाणि. बिधातन भागम क्या लिख, कैना कुछ...
Literature
हां हूं मैं मॉडर्न खयालो की पर जानती हूं मैं संस्कार भी, हां हूं मैं खुले विचारों वाली पर जानती...
माँ को मूर्खता का पाठ पढ़ता बचपन जन मूर्ख-दिवस पर रो रहा है मेरा मन माँ को मूर्खता का पाठ...
आस मेरा ज्यू बतौ, दुखेरु- क्यांकु हूंणी छै. किलै खमोसि भितनै, क्यांकु रूंणी छै.. यो- अजोक- बिजोक, त्वेकु हि नि...
हुणत्यळि मवसि हे शिब्बू की ब्वै ! हे वीं बुढड़ी....... पर कख? क्वी जवाब ना, तब सुबदार साब। जगतराम जी...
छाले बेरोजगारी के हे पथिक! मत कर छालों की परवाह, आगे सफलता की मंजिल खड़ी है। दौड़ता जा कांटों भरी...
मैं आज भी जीवित हूं तो प्रभु तेरा ही रचा ये खेल है वरना कहां मैंने भरी आज तक इतनी...
बतावा बतावा य जड़ा- बड़ी , क्याकि हुयीं चा. टोका-टोकि घड़ि-घड़ी, क्याकि हुयीं चा. अपण - अपण बाटा, हिटड़ि द्या...
एक छोटा सा शब्द जिसमे मेरी जान बसती है, रोते हुए भी मेने मुकुराया हे जब मेरी माँ हंसती है...
वेदना मेरे मन की एक वेदना है मेरे मन में, पुछूं तो पूछूं किससे। कौन कोरोना का हल्ला मचा रहा...
