बतावा बतावा य जड़ा- बड़ी , क्याकि हुयीं चा. टोका-टोकि घड़ि-घड़ी, क्याकि हुयीं चा. अपण - अपण बाटा, हिटड़ि द्या...
Literature
एक छोटा सा शब्द जिसमे मेरी जान बसती है, रोते हुए भी मेने मुकुराया हे जब मेरी माँ हंसती है...
वेदना मेरे मन की एक वेदना है मेरे मन में, पुछूं तो पूछूं किससे। कौन कोरोना का हल्ला मचा रहा...
वो लड़का साहब, वो बाहर से मुस्कुराता है, वो खुश भी है, पर न जाने क्यों, उस मुस्कुराहट के पीछे...
वाह ! भाई कोरोना। तू आ गया ! हम सदा ही जमीन पर भार रहे। जिंदा लाश का भार ढोते...
मृत्यु का यह मुख्यद्वार मुबारक यह चुनावी त्योहार मुबारक। यह ज़हरीली फुहार मुबारक मेरी इक इक साँसो का होता। तुमको...
दिन कर गये कविता से राम को धारण कर मन में, दिन कर गये कविता से। अर किरणों को बना...
पॉड़ि-पॉड़ि अबि त-कड़क रूड़ नि पड़ि, गौंम सूख पड़िगे. मौल्यार बगत-अबि बटि, निचट रूख पड़िगे.. गौं का स्वाता- पंदेरा ,...
महाकाल कोरोना आया, सर पर मंडराया मौत का साया ! सवा तीन लाख आज संक्रमित, समय नहीं होने का भ्रमित।...
बाहर कोरोना कातिल खड़ा है वजह क्या है, बाहर निकलने की, विक्षिप्त कातिल बाहर खड़ा है। जरूरत क्या,कातिल से मिलने...
