ये प्रकृति भी अजीबोगरीब खेल दिखाती है। कहीं सुख का अहसास कराती है, तो कभी इसका दुख रूपी ऐसा रूप...
साहित्य
30 जनवरी को हम शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। सेवा के दौरान निर्देशानुसार विद्यालयों में ठीक 11:00 बजे एक...
बचपन से आज तक देखता रहा हूं कि हम छोटी-छोटी बातों पर दूसरे पर निर्भर होते जा रहे हैं। चाहे...
इतना आसान नहीं होता जनाब एक लड़का हो ना, हजारों गमों के बिच भी होठों पर मुस्कान लाना, घर के...
सब छपा है, सब छपा है, आज इन अखबार में। मैं छपा हूं, तू छपा है, ये छपा है, वो...
अरे यार जिंदगी में परेशानियां तो सबकी होती है। खुद की किस्मत पर रोना शामों- सुबह किस लिए अरे यार...
बरखा (वर्षा) आई तुम तो फैली चारों ओर हरियाली पड़ी बौछार पहली तो जन जीवन में भरी खुशहाली आते ही...
बचपन में मुझे जो पसंद था, काश आज भी वही होता तो शायद मैं खुश रहता। क्योंकि तब मैं ज्यादा...
व्यथा किस से कहूँ दिल की कोई हमारा नहीं। सब के सब स्वार्थी हैं कोई हम छात्रों का सहारा नहीं।...
योगी नहीं ये तो भोगी हैं। साधु नहीं ये तो स्वादु हैं। जिनका काम दूसरों को नसीहत देना है, लेकिन...
