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March 28, 2026

कवि एवं साहित्यकार

नौछमि-नारैंण नौछमि नारैंण छु मीं, जन्म ल्यूंलु आज. मना मंसा पूरि करलु, मंग्यूं- द्यूंलु आज.. मिंछु दगड़्यूं-कु दगड़्या, मिन-दग्ड़ु निभै,...

अपड़ा-हाल अपड़ा हाल देखि, ज्यू-ज्यान खिजणूं च. कोच यो, जो मीं-भलु आदिम बोल़णूं च.. बचपना आंडि- बांडि, बुढापा तक चलीं,...

उर्ययूं काम क्वि बि उर्ययूं काम, जब न तब पुर्यये जांद. ऐंडा- बैंडौं कु, कबि-कबि ऑखि घुर्यये जांद.. पैंसा ह्वे...

एक-दिन बक्त फरि- कमयूं पैंसा, खरचण पोड़द. ये जीवन छैंद- वीं पैंसा, बरतण पोड़द. निलै- निखै जीवन, मस्स-मसिकि जांद, जंक-...

रखड़ि त्युहार रखड़ि धागु-प्यार कु धागु, कच्चु न पड़णीं दे. जल्मभरा भै-भैंण्यूं प्यार, फल्णी-फुलणीं दे.. सालौं-साल मनाण हमन, प्रेम-प्यार-त्योहार, बाप-दादौं...