पव्वा पत्रकार! हां है वह!पव्वा पत्रकार है वह!चाटुकारों का सरदार है वह!जन सरोकारिता का सवाल नहीं!खैराती कुर्सी का उसे लिहाज...
ललित मोहन गहतोड़ी
बंद करो… अजी तानाशाही! कैसी देखो, विपदा आई।लाल बिछड़, रहा माई माई।।तुम तो छक, रहे दूध मलाई।वह क्यों औंधे, पड़ा...
