मेरी कविता में आना श्री राम! मेरी कविता में आना। मेरी कविता बनें गीता- ज्ञान, मेरी कविता में आना॥ कविता...
उत्तराखंड
ख्वाब देखना तो हसरत है इन आंखों की। पर हर ख्वाब ही मुकम्मल हो जाए ये ज़रूरी तो नहीं॥ बहुत...
मौसम की मार। ग़रीब लाचार। हर दिन पेट सहे भूख़ के वार। मांग जो लाए चार दिन उधार। राह में...
मैं ही मैं, मैं ही मैं सुबह - शाम, मैं ही मैं। मैं ही मैं, मैं ही मैं। जब भी...
ज्योति पाकर हीरा कोयलों से निकलता है। दाग़ियों को छोड़ सुशासन बाबू चमकता है।। महत्वाकांक्षी तम में भटक कोयलों से...
एक कोशिश तो बाकी है टूटे हैं पंख अभी तो क्या, हौसलों की उड़ान बाकी है। क्षितिज तक उड़ान न...
रिश्ते क्यों रिसते हैं ये रिश्ते जान नहीं पाती हूँ स्वप्न रुलाते हैं और दिनभर गमगीन करते हैं क्यूं रिसते...
गणतंत्र का पर्व गणतंत्र का शुभ दिवस आया। भारत मां का मन हरषाया। आसमान को छूए तिरंगा शीश गर्व से...
तू और तेरी जिंदगी क्या एक सपने से ज्यादा ये जीवन कुछ भी नहीं यहां हाँ ! कल ही नींद...
दिल में खोट है राम की सिर्फ़ ओट है। वरना दिल में खोट है। चरण उनके चूमेंगे जो भी उनके...
