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January 12, 2026

प्रवासी मजदूरों के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 31 जुलाई तक राज्य लागू करें एक नेशन, एक राशन कार्ड योजना, केंद्र दे अतिरिक्त अनाज

लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने ऐसे लोगों के प्रति चिंता जाहिर की और केंद्र व राज्य सरकारों को इस संबंध में आदेश दिए।

लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने ऐसे लोगों के प्रति चिंता जाहिर की और केंद्र व राज्य सरकारों को इस संबंध में आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य, जुलाई 2021 तक एक नेशन एक राशन कार्ड योजना लागू करें। इसके साथ ही केंद्र को राज्यों को अतिरिक्त अनाज आवंटित करने का निर्देश देते हुए कहा है कि राज्यों को प्रवासियों को सूखा राशन वितरण के लिए एक योजना लानी चाहिए। राज्यों को प्रवासी श्रमिकों के लिए महामारी के अंत तक सामुदायिक रसोई चलानी चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों समेत सभी प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण का काम 31 जुलाई 2021 तक पूरा करें।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को हो रही समस्याओं पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। 24 मई को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के प्रति सुप्रीम कोर्ट नाराजगी कर चुका है। कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण की धीमी प्रक्रिया पर नाराजगी जताई थी। साथ ही लेबर रजिस्ट्रेशन स्कीम के स्टेटस के बारे में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।
पिछले साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन करने का फैसला सुनाया था। प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा पर ध्यान देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उनके पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद धीमी हो रही है और वह इस मामले पर केंद्र और राज्यों को निर्देश जारी करेगा। हालांकि, जस्टिस अशोक भूषण और एमआर शाह ने कहा था कि वह राहत पैकेज के तौर पर रुपये देने का आदेश नहीं देगें। क्योंकि ये एक नीतिगत निर्णय है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण हो जाए तो सरकारें उन प्रवासी कामगारों को लाभ दे सकती हैं, जिन्होंने महामारी के दौरान रोजगार खो दिया है। पीठ ने कहा था कि यह एक मुश्किल काम है, लेकिन इसे हासिल करना होगा।

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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