वफादारी की मिसाल, बर्फ में चार दिन तक मालिक के शव की रखवाली करता रहा बेजुबान, रेस्क्यू टीम के भी निकले आंसू
ये कहावत फिर से पुख्ता हो गई कि इंसान से ज्यादा वफादार जानवर होता है। कोरोनाकाल तो सब को याद होगा, जब कई लोगों ने अपने ही परिजनों के शव तक को हाथ से नहीं छुआ। वहीं वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली कि जो भी इस खबर को पढ़ेगा, वह भीतर से ऐसी वफादारी देख कई बार सोचने पर मजबूर हो जाएगा कि जानवरों में मालिक के प्रति कितना प्रेम होता है। कारण ये है कि एक कुत्ता अपने मालिक की मौत पर चार दिन तक शव के पास ही बैठकर रखवाली करता रहा। उसे देख रेस्क्यू वालों के भी आंसू निकल पड़े। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
घटना हिमाचल प्रदेश के भरमौर क्षेत्र की है। एक कुत्ते ने अपने मृत मालिक के शव के पास चार दिनों तक बिताए। ठंड और भारी बर्फबारी के बावजूद कुत्ता न तो कहीं गया और न ही कुछ खाया। कुत्ते ने जंगली जानवरों से अपने मालिक के शव की सुरक्षा भी की। देवभूमि हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर के दुर्गम जंगलों में भारी बर्फबारी के बीच जान गंवाने वाले अपने मालिक के शव को उसका पालतू ‘पिटबुल’ कुत्ता चार दिनों तक अकेला छोड़कर नहीं गया। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और बिना कुछ खाए-पिए वह मालिक की लाश की पहरेदारी करता रहा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जानकारी के अनुसार, भरमौर के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में एक व्यक्ति की बर्फबारी और ठंड की चपेट में आने से मौत हो गई थी। जब चार दिनों बाद बचाव दल और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर सबकी आंखें नम हो गईं। व्यक्ति का शव बर्फ से ढका हुआ था, लेकिन उसका पालतू कुत्ता वहीं जम कर बैठा था। इन चार दिनों में न तो उस बेजुबान ने कुछ खाया और न ही अपनी जगह छोड़ी। उसने न केवल बर्फीले तूफान का सामना किया, बल्कि जंगली जानवरों से भी अपने मालिक के शरीर की रक्षा की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जानकारी के अनुसार, 23 जनवरी को घरेड़ निवासी 19 वर्षीय विकसित राणा और मलकोता निवासी उसका 13 वर्षीय ममेरा भाई पीयूष भरमाणी माता के दर्शन के लिए निकले थे। उनके साथ था पीयूष का प्यारा डॉगी भी मौजूद था। जो सिर्फ पालतू नहीं, परिवार का हिस्सा था। दोनों अपने साथ कैंपिंग का सामान भी ले गए थे। मंदिर के ऊपरी इलाकों में वीडियो शूट करते वक्त मौसम ने अचानक कहर ढा दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
तेज बर्फबारी, बर्फीला तूफान और शून्य से नीचे गिरता तापमान। रास्ते ओझल हो गए और दोनों किशोर पहाड़ों के बीच फंस गए। भरमौर में उस दौरान पांच फीट से अधिक बर्फ गिरी थी, जिससे दोनों युवक रास्ता भटक गए और अत्यधिक ठंड (Hypothermia) के कारण उनकी मौत हो गई। शाम को परिजनों से आखिरी बार बातचीत में उन्होंने खुद को सुरक्षित बताया था, लेकिन उसके बाद संपर्क हमेशा के लिए टूट गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जब दोनों युवक घर नहीं लौटे, तो जिला प्रशासन और रेस्क्यू टीम ने उनकी तलाश शुरू की। चार दिन तक प्रशासन, पुलिस, सेना और वायुसेना उन्हें ढूंढती रही। ड्रोन उड़े, हेलीकॉप्टर भेजे गए, लेकिन पहाड़ खामोश रहे। चार दिनों के कठिन सर्च ऑपरेशन के बाद आज भरमाणी मंदिर के पास के जंगल से दोनों के शव बरामद किए गए। इस दौरान एक चमत्कार या कहें, वफादारी जिंदा थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सोमवार को जब रेस्क्यू टीम बर्फ की चादर चीरती हुई ऊपर पहुंची, तो उनकी आंखें भर आईं। एक कुत्ता, ठंड से ठिठुरता हुआ, अपने मालिक के शव के पास बैठा था। रेस्क्यू टीम उस वक्त हैरान रह गई जब उन्होंने देखा कि पीयूष का पालतू कुत्ता दोनों शवों के पास शांति से बैठा उनकी रखवाली कर रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जब रेस्क्यू टीम शव को उठाने के लिए आगे बढ़ी, तो शुरुआत में कुत्ता काफी आक्रामक हो गया। उसे लगा कि शायद कोई उसके मालिक को नुकसान पहुंचाने आया है। काफी मशक्कत और पुचकारने के बाद जब उसे अहसास हुआ कि ये लोग मदद के लिए आए हैं, तब जाकर वह वहां से हटा। कुत्ता पिछले चार दिनों से शून्य से नीचे के तापमान में बिना भोजन और पानी के वहीं डटा रहा। रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने बताया कि कुत्ता कमजोर हो चुका था, लेकिन फिर भी वह अपने मालिक के पास से हटने को तैयार नहीं था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
रेस्क्यू टीम ने दोनों युवकों के शवों के साथ कुत्ते को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। दो जवान मौतों ने जहां पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है, वहीं कुत्ते की इस बेमिसाल वफादारी की चर्चा अब सोशल मीडिया और पूरे प्रदेश में हो रही है। लोग कह रहे हैं कि इंसान भले साथ छोड़ दे, लेकिन यह वफादार जानवर आखिरी सांस तक साथ निभाता है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



