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April 2, 2026

क्लाइमेट के मोर्चे पर स्टील सेक्टर फेल, स्कोरकार्ड ने खोली पोल

दुनिया की ऊंची-ऊंची इमारतें, पुल, रेल और फैक्ट्रियां जिस स्टील पर खड़ी हैं, उसी स्टील सेक्टर की क्लाइमेट तैयारी अब सवालों के घेरे में है। क्लाइमेट वाच की ओर से जारी नए “कॉरपोरेट स्कोरकार्ड” ने एक साफ और असहज तस्वीर सामने रखी है। इसमें दुनिया की 18 बड़ी स्टील कंपनियों में से एक भी ऐसी नहीं है, जो खुद को कम एमिशन भविष्य के लिए तैयार कह सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यह आकलन ब्राजील, चीन, जर्मनी, स्वीडन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और अन्य देशों की प्रमुख कंपनियों पर आधारित है। इनमें Tata Steel, ArcelorMittal, Nippon Steel और POSCO जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इन सभी कंपनियों का उत्पादन अभी भी बड़े पैमाने पर कोयले पर आधारित ब्लास्ट फर्नेस तकनीक पर टिका है, जो इस सेक्टर के कुल एमिशन का लगभग 90% तक जिम्मेदार मानी जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रिपोर्ट के मुताबिक, 100 में से किसी भी कंपनी का स्कोर 50 तक नहीं पहुंच पाया। ज्यादातर कंपनियां 20 से 30 के बीच सिमटी हुई हैं और औसत स्कोर 27 है। इसका मतलब साफ है, नेट जीरो 2050 जैसे लक्ष्य घोषित करना काफी नहीं है, जब तक उसके पीछे ठोस निवेश और तकनीकी बदलाव नहीं दिखते। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

Caroline Ashley इस स्थिति को सीधे शब्दों में “शर्मनाक” बताती हैं। उनके मुताबिक, “कोई भी स्टील कंपनी 50 अंक तक नहीं पहुंच पाई है, और जो सबसे आगे हैं, उनके पास भी लंबा रास्ता बाकी है। कंपनियों की मौजूदा तैयारी और क्लाइमेट की जरूरतों के बीच बड़ा अंतर साफ दिख रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

स्टील सेक्टर वैश्विक CO2 एमिशन का लगभग 10% हिस्सा है, इसलिए यहां बदलाव सिर्फ उद्योग की जरूरत नहीं, बल्कि क्लाइमेट लक्ष्य हासिल करने की शर्त बन चुका है। लेकिन स्कोरकार्ड दिखाता है कि कंपनियां अभी भी छोटे-छोटे कदमों में उलझी हुई हैं, जबकि जरूरत बड़े और संरचनात्मक बदलाव की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस आकलन में कंपनियों की “ट्रांजिशन रेडीनेस” को कई आधारों पर परखा गया है, जैसे कोयले पर निर्भरता, ग्रीन आयरन का इस्तेमाल, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी, पारदर्शिता और भविष्य की निवेश योजनाएं। इन सभी में सबसे बड़ी कमजोरी दो जगह साफ दिखती है, कोयले से बाहर निकलने की ठोस योजना का अभाव और ग्रीन आयरन जैसे विकल्पों का लगभग न के बराबर इस्तेमाल। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ग्रीन आयरन और रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल के मामले में औसत स्कोर 25 में से सिर्फ 0.6 है। हर एक कंपनी का ग्रीन आयरन खपत पर स्कोर शून्य है। इसका मतलब है कि जिस तकनीक को भविष्य माना जा रहा है, वह अभी तक जमीन पर उतरी ही नहीं है।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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