भारत में विज्ञान का इतिहास पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने विभिन्न वैज्ञानिक सिद्धांतों पर दिया व्याख्यान
उत्तराखंड राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) तथा वैली ऑफ वर्ड्स के संयुक्त तत्वाधान में आंचलिक विज्ञान केंद्र, विज्ञान धाम, झाझरा में “भारत में विज्ञान का इतिहास” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर वैज्ञानिकों ने विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों पर चर्चा की। तकनीकी सत्र का संचालन आईएनएसए नई दिल्ली के सलाहकार डॉ सीएम नौटियाल ने किया। पहला व्याख्यान टीआईएफआर मुंबई के भूतपूर्व प्रोफेसर प्रोफेसर एवं डीन मयंक वाहिया ने दिया। उन्होंने “प्राचीन भारत में खगोल विज्ञान” पर विस्तार से चर्चा की।
जेएनयू, नई दिल्ली ने के भूतपूर्व पोफेसर दीपक कुमार ने “भारत में चिकित्सा का इतिहास” पर व्याख्यान दिया गया। आगे तकनीकी सत्र में जवाहरलाल नेहरू फेलो नई दिल्ली के दिनेश शर्मा ने “सूचना प्रौद्योगिकी के इतिहास” तथा आईआईटी गांधीनगर के सहायक प्रोफेसर डॉ आलोक कुमार कानूनगो ने “भारती में कांच पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इतिहास” पर अपना व्याख्यान दिया। सेमिनार में डीबीआईटी, बीहाइव इंस्टीट्यूट, जेबीआईटी, एल्पाइन इंस्टीट्यूट, आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी, जीआरडी गर्ल्स डिग्री कॉलेज और उत्तरांचल यूनिवर्सिटी देहरादून के 250 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।
इससे पहले उद्घाटन सत्र में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ राजेंद्र डोभाल ने कार्यक्रम का स्वागत भाषण दिया। वैली ऑफ़ वर्ड्स साहित्य महोत्सव के पालिसी एनालिस्ट एवं सलाहकार व इतिहासकार डॉ संजीव चोपड़ा ने वैली ऑफ़ वर्ड्स के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस वर्ष आयोजित किये जा रहे कार्यक्रमों की रूरेखा प्रस्तुत की। उद्घाटन समारोह में मुख्य व्याख्यान इन्सा नई दिल्ली के सलाहकार डॉ सी एम नौटियाल ने दिया। उन्होंने इन्सा की ओर से चलाये जा रहे प्रकल्पों पर विस्तार से चर्च की। साथ ही शोधार्थियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी दी। साइंस सिटी देहरादून के सलाहकार जीएस रौतेला ने उद्घाटन सत्र में उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।




