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January 16, 2026

अंकिता हत्याकांड में अनिल जोशी के मुख्य पैरोकार बनने पर सामाजिक संगठनों ने उठाये सवाल

उत्तराखंड में चर्चिक अंकिता भंडारी हत्याकांड में डॉ. अनिल जोशी की एफआईआर में सीबीआई जांच की संस्तुति को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए है। देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अंकिता हत्याकांड पर राजनीतिक, प्रशासनिक संरक्षण की गंभीर आंशका व्यक्त की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मूल निवास संघर्ष समिति के संयोजक लूशून टोडरिया ने कहा कि उत्तराखंड सरकार अंकिता के माता पिता के पत्र का संज्ञान न लेकर पर्यावरणविद अनिल जोशी की एफआईआर का संज्ञान लेकर सीबीआई जांच की संस्तुति देना सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अनिल जोशी दो वर्ष से इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए थे। अचानक से ऐसा क्या हुआ कि अनिल जोशी को अंकिता घटनाक्रम की गम्भीरता का अंदाजा हुआ और उन्होंने एफआईआर दर्ज की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

राष्ट्रीय रीजनल पार्टी की अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने कहा कि धराली आपदा, जोशीमठ संकट और देवदार के पेड़ों की कटान जैसे उत्तराखंड के ज्वलंत पर्यावरणीय मुद्दों पर चुप्पी लगातर अनिल जोशी को संदेह के घेरे में लाती रही है। मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के राकेश नेगी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड एक ऐसा गंभीर अपराध है, जो प्रथम दृष्टया राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण के साए में घटित हुआ प्रतीत होता है। प्रकरण की जाँच और अब तक की कार्यवाही कई गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनका उत्तर सरकार और जाँच एजेंसियों को देना चाहिए।(खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रमोद काला ने कहा कि सीबीआई जाँच सामान्यतः पूरे प्रकरण की होती है, किंतु इस मामले में जाँच को सीमित कर केवल वर्तमान में वायरल ऑडियो तक समेट दिया गया है, जो न्याय की भावना के विपरीत है। पहाड़ स्वाभिमान सेना के अध्यक्ष पंकज उनियाल ने कहा कि यह तथ्य सामने आया है कि अनिल जोशी हेस्को (HESCO) से जुड़े हैं और सरकार के विभिन्न कार्यों में उनकी भूमिका रही है। ऐसे में उनका इस प्रकरण में मुख्य पैरोकार बनना पूरे मामले को प्रभावित करने और जाँच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उत्तराखंड क्रांति सेना के ललित श्रीवास्तव ने कहा जब अंकिता के माता-पिता द्वारा पहले ही शिकायत दर्ज कराई जा चुकी थी, तो उसी शिकायत के आधार पर सीबीआई जाँच कराने के बजाय नई शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह भी एक गंभीर सवाल है। आकांक्षा नेगी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में लगातार यह देखने को मिल रहा है कि सत्ताधारी भाजपा से जुड़े नेता किसी न किसी रूप में वीआईपी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं पौड़ी जाकर पीड़ित परिवार से मिल सकते थे, तो फिर परिवार को अपने आवास पर बुलाकर गुप्त बैठक क्यों की गई। स्वयं पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जाँच की माँग की थी, लेकिन इसके विपरीत अनिल जोशी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई, जबकि वही एफआईआर अंकिता के माता-पिता को मुख्य पैरोकार बनाकर भी की जा सकती थी। प्रेस वार्ता में अधिवक्ता संदीप चमोली, पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक नमन चंदोला, स्वाभिमान मोर्चा के अनिल डोभाल,जय संविधान संगठन के विकास कुमार उत्तराखंडी, नवनीत कुकरेती,कीर्ति बिष्ट आदि मौजूद रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हाल ही में अचानक इस मामले में नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने इस नाम को उजागर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। इस नए खुलासे के बाद से ही हत्याकांड की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने और वीआईपी सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के साथ ही आम लोग सड़कों पर उतर गए थे। सीएम धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी है। ये संस्तुति एनजीओ चलाने वाले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद की गई।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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