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December 1, 2025

उत्तराखंड में आपदा के लिए 1200 करोड़ की राहत राशि निराशाजनक, बस्तियों में लाल निशान, फैलाई जा रही दहशतः हरीश रावत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड में आपदा से नुकसान की भरपाई के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से 1200 रुपये की घोषणा को नाकाफी बताया। उन्होंने कहा कि ये राशि निराशाजनक है। हरीश रावत ने देहरादून में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री से बड़ी अपेक्षा थी कि कम से कम राज्य सरकार की ओर से जो आंकलन क्षति का केंद्र को दिया गया है, उसके सापेक्ष पर्याप्त धनराशि राज्य को उपलब्ध कराएंगे। वहीं, जो धनराशि घोषित की गई है, उसने राज्यवासियों और आपदा पीड़ितों भी निराश किया है। प्रेस वार्ता को उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने भी संबोधित किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मौके पर प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य में दैवीय आपदा से व्यापक स्तर पर जनहानि के साथ साथ धन हानि भी हुई है। बीते रोज देश के प्रधानमंत्री उत्तराखंड राज्य आए, तो हमें यह अपेक्षा थी कि राज्य सरकार ने जो 5702 करोड़ का प्रस्ताव आपदा में हुए नुकसान को लेकर उनके सम्मुख रखा है, वह उसका मान रखते हुए उसे स्वीकार करेंगे। बड़े खेद का विषय है कि उन्होंने राज्य में आई इतनी भीषण आपदा के लिए राहत राशि के तौर पर मात्र 1200 करोड़ की घोषणा की गई। जो कि बहुत ही निराशाजनक है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य में 2013 की दैवीय आपदा जब आई थी तो केंद्र में कांग्रेस की गठबंधन सरकार थी। साथ ही राज्य में भी कांग्रेस की सरकार थी। उस वक्त हमने दैवीय आपदा के मानकों में व्यापक स्तर पर परिवर्तन किए थे। उसी का नतीजा था कि हम आपदा प्रभावितों का पुनर्वास और विस्थापन करने में सफल हो पाए और आपदा को काबू कर पाए। इस वक्त जो केंद्र सरकार से धनराशि आवंटित की गई है, वह नाकाफी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से हमारी यह अपेक्षा रहेगी कि वह मजबूत पैरवी करके जो क्षति राज्य को आपदा से हुई है, उसकी प्रतिपूर्ति करेगी। प्रीतम सिंह ने यह भी कहा की मलिन बस्तियों को उजाड़ने का जिस तरह से षड्यंत्रकारी काम एलिवेटेड रोड के नाम से राज्य सरकार की ओर से किया जा रहा है, हम उसका भी विरोध करते हैं। जब भी मलिन बस्तियों पर कोई विपत्ति आई है तो कांग्रेस ने हमेशा उनके साथ खड़े होने का काम किया है। हमारी सरकार में 582 मलिन बस्तियों को चिह्नित करने का काम किया गया था और उनको मालिकाना हक देने का काम प्रगति पर था। हमने उन्हें संरक्षण देने का भी वादा किया था। यह एक्ट विधानसभा से पारित है और जिस तरह का आज का राज्य सरकार का रवैया और कृत्य है, हम उसका पुरजोर शब्दों में निंदा करते और भर्त्सना करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से राज्य को 1200 करोड़ रुपये की सहायता राशि की घोषणा राज्य के आपदा प्रभावितों और लोगों को निराश करती है। लोगों की जो आकांक्षाएं और अपेक्षाएं पुनर्वास और पुनर्निमाण की थी, उसको झटका लगा है। रावत ने कहा कि हम ये सोच रहे थे कि देश के प्रधानमंत्री इन हिमालय क्षेत्रों में आ रही आपदाओं को कम करने, आपदाओं का सामना करने के लिए कोई राष्ट्रीय नीति बनाने की घोषणा करेंगे। या कम से कम नीति बनाने का संकेत देंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि बादल फटना, ग्लेशियर पिघलना इन सब पर बहुत कुछ कहा जा चुका है। मूल समस्या ये नहीं कि हमने अत्यधिक पेड़ काट दिए, या सड़के बना दी। यदि ऐसा होता तो राज्य के जो भूभाग 70% वनआच्छादित हैं, वहां बादल नहीं फटते। मध्य उच्च हिमालई क्षेत्रों में यह घटनाएं सर्वाधिक हो रही हैं। इसका दुष्प्रभाव सभी क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इसमें हमारे मैदानी भाबर के क्षेत्र भी शामिल है। यह लंबे समय से हो रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री कई बार यहां आए और उन्होंने इस पावन धरती पर दो-तीन बार तप भी किया। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन के मध्य हिमालय क्षेत्रों में पड़ रहे व्यापक असर के साथ ही हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इसका समना करने के लिए क्या रणनीति है, इस पर वह कभी कुछ बोलकर नहीं गए। रावत ने कहा कि या तो राज्य सरकार अपने प्रतिवेदन में इस बात को रख नहीं पाई, या फिर प्रधानमंत्री ने उनकी सुनी नहीं। उन्होंने कहा कि ये हतप्रभ करने वाला है कि प्रधानमंत्री इतने सारे आपदाग्रस्त क्षेत्र में गए, लेकिन आपदा का जो सबसे प्रभावी कारण है, इस पर कोई चिंता जाहिर नहीं की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हरीश रावत ने कहा कि केंद्र यूपीए के समय में जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए जो आठ मिशन लागू किए गए थे, उसमें से एक मिशन मध्य हिमालय क्षेत्र के लिए भी था। उस मिशन के विषय में कई वर्षों से कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा है। उत्तराखंड में पंडित नेहरू, महावीर त्यागी, इंदिरा गांधी की कृपा से देश के सारे नामचीन संस्थान हैं, जो इस पर शोध कर सकते हैं। हमारा मार्गदर्शन कर सकते हैं और इस पर रणनीति तैयार कर सकते हैं। उनका केंद्र सरकार से कोई कोऑर्डिनेशन या समन्वय हो रहा है या नहीं, इस पर भी पीएम मोदी ने कुछ नहीं कहा। यह चिंता का विषय है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रावत ने कहा कि हम अपनी सरकार में कैबिनेट कमेटी के समक्ष गए थे। कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली कमेटी के समक्ष हमने यह बात रखी थी और हमने यह कहा था कि केवल केदार आपदा नहीं, आपदा के जो कारण है उसके लिए भी कोई रणनीति बनाई जानी चाहिए। ताकि भविष्य में ऐसी आपदा की पुनरावृत्ति ना हो, शोध होना चाहिए, जिसमें खेती के पैटर्न से लेकर भवन निर्माण तक हर चीज को लेकर रणनीति बने ऐसी हमारी अपेक्षा थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि राज्य में पेड़ों का अंधाधुंध कटान हो रहा है। कांग्रेस की पूर्व की सरकार में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत हमने यह फैसला लिया था कि सड़कों के निर्माण में जो मलबा होगा, उसे डंपिंग जोन में निस्तारित किया जाएगा। आज की तारीख में सड़कें काटी जा रही हैं, मलबा नीचे को लुड़का दिया जा रहा है। चार धाम सुधार मार्ग को नाम बदलकर ऑल वेदर रोड कर दिया गया, लेकिन वहां भी पॉलिसी यही अपनाई गई। पहाड़ों को विस्फोटको के जरिये तोड़ा गया। राज्य सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए की सड़क बनाने का यह तरीका ठीक नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों से मिलकर पीएम की आंखें तो सबकी नम हो जा रही हैं, लेकिन उनके पुनर्वास उनकी आजीविका इत्यादि का क्या होगा, इस पर चुप्पी है। भटवाड़ी, हर्षिल, थराली सब जगह लोगों के खेत खलिहान, बाग बगीचे, होमस्टे सब नष्ट हो गए। लोग कर्ज में डूबे हुए हैं। राज्य सरकार को चाहिए कि सबसे पहले उनका कर्ज माफ करे। दूसरे चरण में उनकी क्षति का आकलन करके उनकी आजीविका को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। जिस रूप में थी यदि इस रूप में पुनर्जीवित किया जाए तो बेहतर होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि 2013 की दैवीय आपदा को आप आज की आपदा से तुलना नहीं कर सकते। 2013 में हमने लोगों को यदि पांच लाख दिए तो आप आज 12 साल बाद भी पांच लाख रुपये की सहायता पर ही। अब कॉस्ट आफ कंस्ट्रक्शन बढ़ गया है। हर चीज की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है तो फिर राहत राशि भी डबल इंजन की तर्ज पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार में मलिन बस्तियों के लिए समिति बनाई गई थी। इसका अध्यक्ष पूर्व विधायक राजकुमार को बनाया। हमने उनसे सर्वे करने को कहा कि कितनी मलिन बस्तियां हैं और कितने लोग उसमें रह रहे हैं। उनको आईडेंटिफाई कीजिए और हम विधानसभा में कानून बनाया। साथ ही मलिन बस्तियों को नियमित करने की कार्यवाही शुरू की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि आज यह सरकार एलिवेटेड रोड के नाम से एक अध्यादेश लाकर राज्य के उस कानून को खत्म नहीं कर सकती। राज्य की विधानसभा, उसका लेजिस्लेचर यदि कोई कानून बनाता है, एक्ट लागू करता है उसे धामी सरकार एक ऑर्डिनेंस से सरपास करना चाहती है। ऐसा करके भाजपा सरकार एक असंवैधानिक कार्य कर रही है। क्योंकि विधानसभा ने पारित करके एक एक्ट लागू किया है, उसको ऑर्डिनेंस सप्लीमेंट नहीं कर सकता। पहले आप वह लागू करो जो हमारे कार्यकाल में विधानसभा ने पारित किया। उसके बाद आपको एलिवेटेड रोड बनानी है या कुछ और बनाना है, बनाते रहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि लाल निशान का आतंक दिखाकर मलिन बस्तियों में दहशतगर्दी का माहौल खड़ा कर दिया है, उसे बंद करो। आज की तारीख में कोई भी छोटा अधिकारी मलिन बस्ती में जा रहा है और उगाही कर रहा है। डरा रहा है, धमका रहा है कि माल लाओ नहीं तो निशान लाल लगा दूंगा। पूर्व की कांग्रेस सरकार के दौरान विधानसभा में जो एक्ट पास हुआ है, वर्तमान सरकार उसको लागू करे। साथ ही मलिन बस्तियों के लोगों को उनके मालिकाना हक दे। उनके अधिकारों का संरक्षण दें। नहीं तो कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन करेंगी।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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