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July 11, 2026

देवभूमि के 25 वर्षों का चिंतन, उत्तराखंड के विकास की दिशा पर की गई चर्चा

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ब्रह्मकमल शक्ति संस्था और दून डायलॉग की ओर से दून लाइब्रेरी में “उत्तराखंड एक विचार – देवभूमि के 25 वर्षों का चिंतन” कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम उत्तराखंड की 25 वर्ष होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश ने क्या खोया, क्या पाया और आगे की रूपरेखा, उत्तराखंड प्रदेश के विकास की दिशा कैसी होनी चाहिए इस पर चर्चा की गई। गोष्ठी में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक व अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने विमर्श किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के शहीदों को नमन व राज्य बनने के बाद से विगत 25 वर्षों में आपदाओं में अपनी जान गंवाने वाले व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने से की गई। इस मौके पर ब्रह्मकमल शक्ति संस्थान के अध्यक्ष व दून डायलॉग के संयोजक अभिनव थापर ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को बने 25 वर्ष हो गए हैं। इसे लेकर ही चिंतन किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रथम सत्र में पर्यावरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी पर चर्चा
इस मौके पर विगत 25 वर्षों में राज्य का लेखा-जोखा और आने वाले वर्षों की रूपरेखा पर चर्चा के साथ ही प्रथम सत्र में पर्यावरण व साइंस और टेक्नोलॉजी पर मंथन किया गया। इसमें गंगा हिमालय बचाओ अभियान के संस्थापक और विधायक किशोर उपाध्याय, स्वामीराम हिमालय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजेंद्र डोभाल, दून डायलॉग के संयोजक अभिनव थापर, हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने विचार रखे। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने सत्र संचालन किया। सत्र में टिहरी बांध, दूनघाटी एक्ट, गंगा–हिमालय बचाओ, तकनीक आधारित रोजगार व विदेशों में पर्यावरण की रक्षा के विषयों पर मंचन हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

रोजगार, राज्य के युवा की राज्य की आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा
दूसरे सत्र में राज्य में रोजगार, राज्य के युवा की राज्य की आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की गई। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व मेयर व विधायक विनोद चमोली, उक्रांद के केंद्रीय उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट ने विचार रखे। सत्र में राज्य की मूल धारणा रिवर्स पलायन, हिमालय नीति, मैदान–पहाड़ के विकास की नीति, आपदा नियंत्रण, जल संसाधन आदि विषयों पर भविष्य के रोड मैप पर चिंतन हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपरा, महिला सशक्तिकरण पर चर्चा
तीसरे सत्र में “उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपरा व महिला सशक्तिकरण” विषय पर चर्चा की गई। इस परिचर्चा में पद्मश्री व लोक गायक बसंती देवी, लोक गायक सौरभ मैठाणी, राज्यमंत्री विनोद उनियाल, हाईकोर्ट के अधिवक्ता स्निग्धा तिवारी ने विचार रखे। संगीत–नाटक में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित व रंगकर्मी डॉ राकेश भट्ट ने परिचर्चा में सत्र संचालन किया। सत्र में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, गायन, कलाकारों के संघर्ष, महिलाओं की राजनीति में भागीदारी, जोशीमठ आपदा, महिलाओं का यौन–उत्पीड़न व एसिड अटैक आदि विषयों पर गंभीर विचार रखे गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम संयोजक अभिनव थापर ने इस कार्यक्रम में सहयोग देने के लिए सबको धन्यवाद प्रेषित किया। कार्यक्रम में वक्ताओं से दर्शकों के रूप में वरिष्ठ नौकरशाह, राज्य आंदोलनकारी, शिक्षाविद व अन्य क्षेत्र के लोगों ने सवाल – जवाब भी किए। ब्रह्मकमल शक्ति संस्था की ओर से वक्ताओं व अथितियों का स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यकम में यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट, हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिजय नेगी, हाईकोर्ट अधिवक्ता स्निग्धा तिवारी, आंदोलनकारी द्वारिका बिष्ट, जयदीप सकलानी, पूर्व मुख्य सचिव नृप सिंह नेपच्याल, दून लाइब्रेरी से चंद्रशेखर जोशी, निकोलस, MAD संस्था के अध्यक्ष करण कपूर, दिल्ली के पूर्व विधायक पंकज पुष्कर, प्राची जुयाल, शालिनी कुड़ियाल, दिव्या कपरूवान थापर आदि ने भी भाग लिया।
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