Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

January 16, 2026

कविताः देखना..सुबह एकदिन फिर मुस्कुराएगी

देखना…एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी

चारों ओर अंधेरा घना
आकाश काले बादल सना
रातें लम्बी उदासी भरी
लेकिन शीघ्र स्थितियां सुधर जाएगी

देखना..सुबह फिर मुस्कुराएगी

दिन रात सन्नाटों भरे
रोज जख्म हरे के हरे
मौत पर मौत का टांडव
पर जिंदगी को मौत कब तक डराएगी

देखना..एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी

मुंह बांध हाथ धो
अदृश्य शत्रु से सब डरो
मरने से भला घुट घुटकर जीना
जहरीली हवाऐं एक दिन बदल जाऐगी

देखना..एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी

लाचारी मुश्किलें परेशानियां
मुफलिसी गुमनामियां
हिम्मत से ही हालात बदलेंगे
बारिश पर्वतों को कब तक डराएगी

देखना..एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी
मानवता से प्रकृति की जंग
धरा है आत्मचिकित्सा में मलंग
माना रिश्ते इनके अति तंग
लेकिन एक दिन धरा संग मानवता फिर गुनगुनाएंगी

देखना..एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी

गम छंट जाएंगे
हर्ष बंट जाएंगे
रोशनी आएगी चहुंओर बेशक
वीरों को मुश्किलें कब तक डगमगाएगी

देखना..एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी

ना हमेशा अंधेरा रहा
ना रोशनी रही सदा
दौर बुरा है ये दहशत का
लेकिन कल दहशत सुकून से हार जाएगी

देखना..एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी

कवयित्री का परिचय-
सोनिका रमोला नेगी
प्रवक्ता राजनीति विज्ञान
राजकीय बालिका इंटर कालेज दौलाघट अल्मोड़ा

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *