लखीमपुर खीरी की घटना के बाद उत्तराखंड में एनएसए लागू, 31 दिसंबर तक डीएम को दिया अधिकार
लखीमपुर खीरी की घटना के बाद से ही विभिन्न आंदोलनों के चलते उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाने को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया है। विभिन्न जिलों में हुई हिंसा की घटनाओं के बाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं होने की संभावना है।
लखीमपुर खीरी की घटना के बाद से ही विभिन्न आंदोलनों के चलते उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाने को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया है। विभिन्न जिलों में हुई हिंसा की घटनाओं के बाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं होने की संभावना है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को बनाने के लिए एनएसए (NSA) लागू किया गया है। जिलाधिकारियों को 31 दिसंबर तक एनएसए में शामिल शक्तियों के प्रयोग का भी अधिकार दे दिया गया है।एनएसए या राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) वो कानून है। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा में बाधा डालने वालों पर लगाम लगाता है। इस अधिनियम-1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को ज्यादा शक्ति देने का कानून है। किसी भी राज्य की सरकार को अगर लगता है कि कोई भी कानून व्यवस्था में किसी तरह की परेशानी बन रहा है तो उसे एनएसए के तहत गिरफ्तारी का आदेश दिया जा सकता है। आवश्यक सेवा की आपूर्ति में बाधा बनने पर भी एनएसए के तहत गिरफ्तार करवाया जा सकता है। यूपी के लखीमपुर खीरी में हुई चार किसानों की मौत की घटना के खिलाफ जगह जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके साथ ही अन्य मुद्दों पर जगह जगह राजनीतिक, विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए सरकार ने ये कदम उठाए हैं।
लखीमपुर खीरी की घटना
गौरतलब है कि पिछले महीने के अंत में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा मिश्रा ने कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह 10-15 लोगों का विरोध है और उन्हें लाइन पर लाने में सिर्फ दो मिनट लगेंगे। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य का लखीमपुर खीरी में एक कार्यक्रम था। इन नेताओं का काले झंडे दिखाने के लिए किसान काफी संख्या में खड़े थे। बताया जा रहा है कि दोनों नेता दूसरे रास्ते से कार्यक्रम स्थल चले गए। तभी मंत्री के काफीले में शामिल तीन कारें आई और किसानों की भीड़ को कुचल दिया। इस हादसे में चार किसानों की मौत हो गई। इसके बाद हिंसा भड़की और काफिले में शामिल कारों सहित कई वाहनों में आग लगा दी गई। एक कार में सवार चालक सहित तीन लोगों की हत्या कर दी गई। हालांकि किसानों का कहना है कि चारों लोगों की मौत कार पलटने से हुई। वहीं, किसानों का आरोप है कि उन पर गोलियां चलाई गई।
आरोप है कि किसानों को कुचलने वाली कार में मंत्री का बेटा था। यूपी पुलिस ने लखीमपुर हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे सतीश मिश्रा समेत 14 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सतीश मिश्रा को लखनऊ से हिरासत में लिया गया है। यूपी पुलिस ने धारा 302, 120बी और अन्य धाराओं में यह केस दर्ज किया है। वहीं, घटनास्थल की तरफ जा रही कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को रोका गया और हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही सपा नेता अखिलेश यादव सहित कई नेताओं को घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया।
बाद में किसान और प्रशासन के बीच हुई वार्ता में कई बिंदुओं पर सहमति बन गई है। इसमें आठ दिन के भीतर दोषियों की गिरफ्तारी करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही मृतकों के आश्रितों को 45 लाख का मुआवजा, घायलों को दस लाख रुपये देने पर सहमति बनी है। साथ ही मृतकों के परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने पर भी सहमति बनी है। साथ ही ये आश्वासन भी दिया गया कि घटना की हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज से जांच कराई जाएगी।




