उत्तराखंड में तेज बारिश, बरसाती नाले में बही स्कूल बस, कल रेड अलर्ट की चेतावनी, कई जिलों में स्कूल बंद
उत्तराखंड में कई दिनों से जारी बारिश के सिलसिले में अब रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार 19 जुलाई की सुबह से ही देहरादून से लेकर कई इलाकों में सुबह से ही झमाझम बारिश हो रही है।
उत्तराखंड में कई दिनों से जारी बारिश के सिलसिले में अब रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार 19 जुलाई की सुबह से ही देहरादून से लेकर कई इलाकों में सुबह से ही झमाझम बारिश हो रही है। कहीं कहीं तेज बौछारें भी देखने को मिल रही है। भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद भी राज्य भर में आज स्कूल खुले हैं। मौसम विभाग ने आज के लिए आठ जिलों देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, उधिसिंह नगर, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही कल भी बारिश का दौर जारी रहेगा। 20 जुलाई को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, उधमसिंह नगर, हरिद्वार जिले में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी और कहीं कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी है। शेष राज्यों में कल भारी से बहुत भारी का ओरेंज अलर्ट है। भारी बारिश की संभावना के मद्देनजर देहरादून, नैनीताल जिला प्रशासन ने 1 से 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी, गैर सरकारी, अर्द्ध सरकारी, हिन्दी, अँग्रेजी माध्यम के स्कूल, मदरसे, आंगनबाड़ी केंद्र कल भारी बारिश के रेड अलर्ट के मद्देनजर बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और अन्य सभी कार्मिक ड्यूटी पर आएंगे। 21 से 23 जुलाई तक राज्यभर के कई जिलों में ओरेंज अलर्ट है। ऐसे में शासन की ओर से मुख्य सचिव ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। साथ ही मौसम विभाग ने तेज बारिश के दौरान पर्वतीय इलाकों में सफर ना करने की सलाह दी है। तेज बारिश के चलते नदी, नालों में जल प्रवाह बढ़ने, मैदानी इलाकों में जलभराव की समस्या और पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन का ज्यादा खतरा है।बरसाती नाले में बही स्कूल बस
पहाड़ पर हो रही बारिश से काफी नुकसान हो रहा है। कई जगहों पर सड़के मलबे से बंद है तो कई जगह पानी के तेज बहाव से हादसे हो चुके। मंगलवार सुबह टनकपुर में बच्चों को स्कूल लाने के लिए जा रही बस किरोड़ा नाला के तेज बहाव में आकर पलट गई। गनीमत रही कि इसमें बच्चे नहीं थे। बस के आगे का शीशा टूटने से चालक-परिचालक ने किसी तरह निकलकर अपनी जान बचाई। इसके चालक ने बताया कि वहां पर एक कार फंसी हुई है। साथ ही पूर्णागिरि दर्शन को जाने वाले श्रद्धालु भी नाले के तेज होने से फंस गए है।
जारी रहेगा बारिश का सिलसिला
राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, उत्तराखंड में आगामी एक सप्ताह तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। 20 जुलाई से 23 जुलाई तक राज्य के जिलों में कहीं कहीं तेज बौछार के साथ और अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर चलता रहेगा। इस दिन अधिकांश जिलों में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। 21 जुलाई को रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल जिले में कहीं कहीं भारी बारिश की संभावना है। वहीं, 22 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली जिले में कहीं कहीं भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में चारधाम यात्रियों को भी बारिश के दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत है। 23 जुलाई को भी इसी तरह की स्थिति रहेगी। ऐसे में 21 से 23 जुलाई तक राज्यभर में इन जिलों में ओरेंज अलर्ट है।
तापमान की स्थिति
यदि हम मंगलवार 19 जुलाई को देहरादून के तापमान पर नजर डालें तो सुबह साढ़े दस बजे तक 29 डिग्री सेल्सियस के करीब था। इसके अधिकतम 29 और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। कल 20 जुलाई को अधिकतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 21 और 22 जुलाई को भी एक डिग्री गिरकर 27 डिग्री सेल्सियस हो सकता है। 23 और 24 जुलाई को अधिकतम तापमान 28 डिग्री और 25 व 26 जुलाई को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के करीब रह सकता है।
मुख्य सचिव ने दिए अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने उत्तराखण्ड के विभिन्न हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा के दृष्टिगत कमिश्नर गढ़वाल एवं कुमाऊं सहित सभी जिलाधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाते हुए आने वाली चुनौती के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने भारी बारिश की सम्भावना को देखते हुए प्रत्येक स्तर पर सतर्कता बरते जाने एवं सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के भी निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र एवं सभी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों में सभी विभागों द्वारा सक्षम स्तर के नोडल अधिकारियों को तैनात किए जाने के निर्देश दिए ताकि आपदा जैसी परिस्थितियों में नोडल अधिकारी निर्णय लेने एवं निर्देश देने हेतु अधिकृत हों।
मिनिमम रिस्पाँस टाईम किया जाए सुनिश्चित
मुख्य सचिव ने पूरे मानसून काल में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर सडकें टूटने अथवा धंसने की स्थिति में सडकों पर यातायात सुचारू करने हेतु जेसीबी एवं पौकलैण्ड मशीनें तैनात किए जाने के निर्देश दिए हैं ताकि आम जनता को आवागमन मे कोई परेशानी का सामना ना करना पडे़। उन्हांने पेयजल व विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे मानसून के दौरान विद्युत एवं पेयजल सूचारू रखने हेतु दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों मे अभी से उपकरण अथवा सामग्री स्टोर करें ताकि मानसून के दौरान विद्युत एवं पेयजल बाधित होने पर तत्काल सुचारू किया जा सके।
नदियों एवं बैराजों के जलस्तर पर रखी जाए पैनी नजर
मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के निर्देश दिये कि वे वर्षाकाल में नदियों व बैराजों के जलस्तर पर पैनी नजर रखने के साथ ही बाढ़ चौकियों को सक्रिय करते हुये नदियों का जलस्तर बढ़ने पर चेतावनियां एवं मुनादी आदि जारी करने हेतु व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए ताकि जानमाल की हानि को रोका जा सके। उन्होंने सभी राजस्व उपनिरीक्षक, ग्राम विकास अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों को भी अपने-अपने कार्यस्थलों में बने रहने हेतु निर्देशित किया है। साथ ही, सभी चौकियों एवं थानों में भी आपदा सम्बन्धी उपकरणों एवं वायरलैस सहित हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
खाद्यान्न एवं संचार की समुचित व्यवस्था की जाए सुनिश्चित
मुख्य सचिव ने वर्षाकाल के दौरान अथवा आपदा जैसी परिस्थितियों हेतु चिन्हित खाद्यान्न गोदामों में खाद्यान्न की समुचित मात्रा की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने हेतु निर्देश दिए। उन्होंने आपदा के दृष्टिगत दुर्गम स्थलों में दूरसंचार व्यवस्था सुचारू बनाए रखने हेतु एसडीआरएफ द्वारा उपलब्ध कराए गए सैटेलाइट फोन्स को भी एक्टिव रखने हेतु निर्देश दिए। साथ ही, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाईयों एवं आवश्यकत उपकरणों की समुचित मात्रा सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने जनसामान्य से भी अपील की है कि भारी बारिश की सम्भावना को देखते हुए अत्यधिक आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें। उन्होंने श्रद्धालुओं से भी चारधाम यात्रा एवं कांवड़ यात्रा पर मौसम के अनुसार ही निकलने की सलाह दी है।
मुख्य सचिव के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा द्वारा सभी जिलाधिकारियों एवं आपदा से सम्बन्धित विभागाध्यक्षों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनके स्तर पर की गई तैयारियों के संबंध में विचार विमर्श कर की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सचिव आपदा प्रबंधन ने मैदानी जिलों के जिलाधिकारियों से बाढ़ चौकियों के साथ बाढ़ नियंत्रण टीमों के गठन के साथ ही आवश्यकता के दृष्टिगत बोट आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने आपदा प्रभावितों को खाद्यान्न एवं पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था के साथ ही पशुओं के चारे आदि को भी समय से प्रबंधन करने को कहा। सचिव आपदा प्रबंधन द्वारा पर्वतीय जनपदों के जिलाधिकारियों से भी आपदा प्रबंधन से संबंधित तैयारियों की समीक्षा की तथा उनके स्तर पर की गई व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने सभी डेमों के निरीक्षण करने, नदियों में पानी बढ़ने की स्थिति की त्वरित सूचना प्रेषण, साइरन सिस्टम, वायरलेस सिस्टम को भी प्रभावी बनाने को कहा। आपदा की स्थिति में बल्क एसएमएस की भी व्यवस्था बनाये जाने के उन्होंने निर्देश दिये, उन्होंने जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर की व्यवस्था बनाये जाने की बात कही।
सचिव आपदा द्वारा आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ ही सिंचाई, लोक निर्माण, पेयजल, विद्युत, खाद्यान्न, स्वास्थ्य आदि विभागों के प्रमुखों से भी वार्ता कर व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की तथा सभी से समन्वय के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को धनराशि उपलब्ध करायी जा चुकी है। सभी जिलाधिकारियों ने सचिव आपदा को अवगत कराया कि उनके स्तर पर एहतियातन आवश्यक व्यवस्थायें कर दी गई है।



