राष्ट्रद्रोह कानून की चुनौती संबंधी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, एजी ने हनुमान चालीसा पढ़ने पर गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आगे सुनवाई हुई। इस दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा का पाठ करने पर गिरफ्तारी किए जाने पर शीर्ष कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया।
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आगे सुनवाई हुई। इस दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा का पाठ करने पर गिरफ्तारी किए जाने पर शीर्ष कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया। देशद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई एन वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की स्पेशल बेंच में सुनवाई हुई। बता दें कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, अरूण शौरी, पूर्व सैन्य अधिकारी और महुआ मोइत्रा की याचिकाओं पर सुनवाई हुई है। वहीं केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दूसरी अर्जी दाखिल की है। जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का वक्त और मांगा है। सोमवार को भी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पहली अर्जी दाखिल कर जवाब दाखिल करने के लिए और वक्त मांगा था।एजी वेणुगोपाल ने पीठासीन जजों से कहा कि देश में क्या चल रहा है। यह कल आपने देखा होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रद्रोह कानून को लेकर व्यापक गाइड लाइन की जरूरत है। इस कानून को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान एजी ने महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा का पाठ करने पर राष्ट्रद्रोह के तहत गिरफ्तारी व बाद में जमानत पर रिहाई (राणा दंपती के केस) का भी जिक्र किया।
राष्ट्रद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। इस पर एजी ने कहा कि वकीलों ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है। इसे दाखिल किए जाने के पूर्व सक्षम अधिकारियों से मंजूरी लेना है। सरकार जवाब दाखिल करे तब तक सुनवाई स्थगित कर दी जाए।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए 9 मई तक का वक्त दे दिया। 10 मई को शीर्ष कोर्ट भादंवि की धारा 124 ए के तहत आने वाले राष्ट्रद्रोह की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ को भेजा जाना चाहिए या नहीं?




