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January 12, 2026

हरीश रावत ने की गंगा की आराधना, धर्म के नाम पर गिनाए अपने काम, गंगा से की ये कामना

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने आज हरकी पैड़ी में गंगा की आराधना की। इस दौरान उन्होंने धर्म के नाम पर अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने आज हरकी पैड़ी में गंगा की आराधना की। इस दौरान उन्होंने धर्म के नाम पर अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने इसे लेकर वर्तमान भाजपा सरकार पर तंज भी कसा।
हरीश रावत ने कल ही घोषणा की थी कि वह रेलवे क्रासिंग पर हुई दुर्घटना में मारे गए चार लागों की आत्म शांति के लिए जल तर्पण देंगे। आज वह पंडित मदन मोहन मालवीय घाट पर पहुंचे और पूजा अर्चना की। यहां उन्होंने घाटों के नामकरण के साथ ही पर्वों पर अवकाश को लेकर भी चर्चा की।
उन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट डाली और उसमें कहा कि-हरिद्वार में माँ गंगा जी के किनारे पंडित मदन मोहन मालवीय घाट पर खड़ा हूँ। चारों तरफ कुछ अराध्य पुरुषों, भगवान कश्यप, भगवान बाल्मिकि आदि के नाम से घाट बने हैं और इनमें से अधिकांश घाटों का नामकरण मेरे कार्यकाल में हुआ। अब कश्यप चौक क्या आकार लेगा! मैं नहीं कह सकता, लेकिन वो नामकरण भी मेरे कार्यकाल में हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि- फिर मन में विचार आ रहा है कि कैसे लोगों ने एक मजार में चादर चढ़ाते जाते वक्त पहनी मेरी टोपी को लेकर दुष्प्रचार प्रारंभ किया। मैंने 4 हिंदू बहन और भाइयों द्वारा मनाये जाने वाले त्यौहारों, जैसे सूर्य देव की आराधना का महापर्व, करवा चौथ सुहाग की मंगल कामना का महापर्व, भगवान रैदास के नाम पर अवकाश आदि के निर्णय भी मेरे कार्यकाल में लिये गए। परशुराम जयंती के अवकाश का निर्णय लेते वक्त मैंने एक और निर्णय अपने को सभी धर्मों का आदर करने वाला दिखाने के लिये, साल भर में 1 दिन आने वाली अलविदा की नमाज, रमजान के आखिरी जुमे की नमाज के 1 घंटे के अवसर को भी मैंने कहा कि कोई भी अर्जी लगाकर के नमाज अदा करने के लिये अवकाश ले सकता है। 1 घंटे का अवकाश और दुष्प्रचार इतना जबरदस्त कि मुझे उसी दुष्प्रचार के बल पर चुनावी हार झेलनी पड़ी। मैं गंगा माँ से यह प्रार्थना करने आया हूं कि सर्वधर्म समभाव का माँ तेरा जो भाव है, तेरे जल से व्यक्ति आचमन भी करता है, वजू भी करता है, मेरा भी वही भाव बना रहे, मुझे अपना आशीर्वाद दो माँ।

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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