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April 5, 2026

हरीश रावत ने किया ट्विट, उड़ा दी गई खबर- छोड़ रहे पार्टी, सिर्फ पार्टी आलाकमान का ध्यान आकर्षण का खेल

कांग्रेस नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक ट्विट क्या किया कि सियासी गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं उठने लगीं। जोश में आकर कई मीडिया की खबरों में यहां तक कह दिया गया कि हरीश रावत कांग्रेस छोड़ रहे हैं। जब खबर पुख्ता न हो तो सूत्र लिख दो और कुछ भी उड़ा दो।

कांग्रेस नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक ट्विट क्या किया कि सियासी गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं उठने लगीं। जोश में आकर कई मीडिया की खबरों में यहां तक कह दिया गया कि हरीश रावत कांग्रेस छोड़ रहे हैं। जब खबर पुख्ता न हो तो सूत्र लिख दो और कुछ भी उड़ा दो। अब यदि देखा जाए तो हरीश रावत ने तब कांग्रेस नहीं छोड़ी, जब वह दो जगह से चुनाव हार गए। यउनके विरोधी ही कांग्रेस छोड़ गए और भाजपा में चले गए, लेकिन वह पिछले चार साल से लगातार सरकार को आइना दिखाते रहे। यानी वह दूसरों को बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं, लेकिन खुद कांग्रेस से कहीं नहीं जाने वाले। फिर ऐसी वजह क्या हुई कि हरीश रावत ने एक ट्विट के जरिये अपना गुस्सा जाहिर कर दिया। यहां इसे ही समझने का प्रयास किया जाएगा।
हमेशा से गुटबाजी की शिकार रही कांग्रेस
कांग्रेस में देखा जाए तो कई गुट हैं। एक नेता की काट के लिए दूसरा नेता तैयार रहता है। पार्टी के आयोजन हों या फिर कोई दूसरे मौके। गुटबाजी हमेशा से ही हावी रही है। हरीश रावत के प्रतिद्वंद्वियों में पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत सहित कई लोग पिछले चुनाव से पहले ही बगावत कर पार्टी छोड़ गए। उनसे पहल सीएम के दावेदारों में एक सतपाल महाराज भी कांग्रेस छोड़ गए थे। वहीं, कांग्रेस पिछला विधानसभा चुनाव बुरी तरह हार गई। फिर सिर्फ हरीश रावत का विरोध करने वालों में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ही रह गए। कुछ माह पूर्व इंदिरा हृदयेश की आकस्मिक मृत्यु के बाद माना जाने लगा कि अब विरोध थम जाएगा और ऐसा नजर भी आने लगा। हालांकि इस बीच गाहे बगाहे पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी हरीश रावत की काट करने से कभी नहीं चूके।
चेहरा घोषित करने की लगातार करते रहे पैरवी
हरीश रावत आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से सीएम का चेहरा घोषित करने की लगातार पैरवी करते रहे। उन्होंने यहां तक कहा कि चाहे किसी दूसरे को चेहरा घोषित करोगे तो मैं उसके पीछे पार्टी संगठन को मजबूत बनाने की मुहिम में जुट जाऊंगा। उनके इस तर्क को कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के साथ ही प्रदेश प्रभारी तक ने नकार दिया और सामूहिक नेतृत्व की बात पर जोर दिया। इसके बाद भी हरीश रावत अपने तर्क को सही ठहराने का लगातार प्रयास करते रहे और ये प्रयास अब भी जारी है।
अचानक फिर बढ़ने लगी गुटबाजी
फिर पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके बेटे पूर्व विधायक के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रीतम सिंह खेमा फिर से सक्रिय हो गया। प्रीतम सिंह अध्यक्ष पद से हटाए गए और उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई। उनके स्थान पर हरीश रावत के चेहते गणेश गोदियाल को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। गणेश गोदियाल ने भी कई कार्यक्रम किए और लगातार कांग्रेस को मजबूत करने की मुहिम में जुट गए। फिर अचानक ऐसे नए समीकरण बनने लगे के हरीश रावत अपनी ही पार्टी के लोगों के नाराज होने लगे।
राहुल की रैली के बाद बढ़ गई नाराजगी
हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली में न केवल हरीश रावत के पोस्टर हटाए गए, बल्कि हरीश रावत के समर्थकों को हरीश रावत जिंदाबाद के नारे लगाने से भी रोका गया। रैली के दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी देवेंद्र यादव ने साफ तौर पर कहा की रैली में केवल राहुल गांधी और कांग्रेस जिंदाबाद के नारे लगेंगे। बड़ा सवाल यह है उत्तराखंड में कांग्रेस हरीश रावत के नाम पर वोट पाएगी ना कि राहुल गांधी के नाम पर। ऐसी में प्रदेश प्रभारी के हालात ऐसे लगते हैं जैसे वह उत्तराखंड कांग्रेस को खुद चलाना चाहते हैं।
प्रदेश प्रभारी से ही ले रहे हैं टक्कर
कांग्रेस के उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव से ही हरीश रावत को टक्कर लेनी पड़ रही है। कारण ये है कि पिछले कुछ दिनों से हरीश रावत की फोटो लगे होर्डिंग आदि शहरों से गायब हो रहे हैं। दूसरे गुटों के होर्डिंग लग रहे हैं। चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष होने के बावजूद उत्तराखंड में कांग्रेस के जो भी चुनावी कार्यक्रम लगाए जा रहे हैं, उसमें प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव न तो हरीश रावत से ही चर्चा कर रहे हैं और न ही प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से। इसी पीड़ा को हरीश रावत ने एक ट्विट के जरिये उजागर किया।
हरीश रावत ने ये किया ट्विट
ट्विटर पर एक लंबे पोस्ट में रावत ने लिखा कि-है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!
अगले ट्वीट में रावत ने लिखा है-फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है-न दैन्यं न पलायनम्” बड़ी उहापोह की स्थिति में हूं। नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।
निकाले गए कई मायने, हरीश रावत बोले- मजा लीजिए
हरीश रावत के ट्विट से स्पष्ट है कि हरीश रावत पार्टी संगठन से नाराज हैं। वह देवेंद्र यादव से भी नाराज चल रहे हैं। हरीश रावत के समर्थक तो यहां तक कहते हैं कि इतने बड़े नेता की उपेक्षा करके कभी कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकती है। ऐसे में हरीश रावत का ट्विट पार्टी आलाकमान पर एक दबाव बनाने के अलावा और कुछ नहीं। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि समय आएगा तो आपको बताएंगे। आपको बुलाएंगे और शेयर करेंगे। आप इस समय आनंद लीजिए।
कांग्रेस छोड़ने की उठने लगी चर्चा
इस ट्विट के बाद हरीश रावत के कांग्रेस छोड़ने की चर्चा भी उठने लगी। हालांकि ट्विट के बाद उन्होंने प्रेस वार्ता में भाजपा पर हमला बोला। वहीं, कई चैनलों ने यहां तक चला दिया कि हरीश रावत कांग्रेस छोड़ सकते हैं। अब सवाल उठता है कि वह कांग्रेस छोड़कर कहां जाएंगे। भाजपा में वृद्धों के लिए जगह नहीं बची है। आम आदमी पार्टी में पहले से ही सीएम का चेहरा घोषित है। फिर स्थानीय दल उत्तराखंड क्रांति दल के बारे में हरीश रावत को पता है कि दल के संस्थापक इंद्रमणि बडौनी के निधन के बाद से ही दल पूरी तरह से बिखर चुका है। या करें कि पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। हां वे चुस्की जरूर ले सकते हैं। अपनी पार्टी के आला नेताओं को जरूर डरा सकते हैं। ताकी वे अपनी इच्छा को पार्टी में पूरा करा सकें। इसी राजनीतिक शतरंज की चाल को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सोशल मीडिया में दो फोटो भी डाली। इसमें यूकेडी नेता उनके घर पर बैठे हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि- आज देहरादून स्थित आवास पर प्रातः उत्तराखंड क्रांति दल के अध्यक्ष श्री काशी सिंहऐरी जी एवं पूर्व विधायक/ अध्यक्ष श्री पुष्पेश त्रिपाठी जी सहित उनके अन्य साथियों ने शिष्टाचार भेंट की।
अब यूकेडी नेताओं के साथ हरीश रावत की फोटो को लेकर भी तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। वैसे भी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को अलग हटकर देखा जाए तो यदि हरीश रावत के उत्तराखंड में दूसरे दलों के नेताओं से भी मधुर संबंध रहे हैं। यूकेडी ने पिछले चुनावों में उनके कहने से नैनीताल सहित कई अन्य स्थानों पर अपने कंडीडेट खड़े नहीं किए। वह कभी पूर्व सीएम त्रिवेंद्र के साथ भेंट की फोटो शेयर करते हैं, तो कभी दूसरे नेताओं के साथ।

पार्टी आलाकमान में अभी तक है बेहतर छवि
पार्टी आलाकमान की नजर में हरीश रावत की अभी तक बेहतर छवि है। हालांकि राहुल गांधी की मुहिम है कि युवाओं को आगे किया जाए। वहीं, पार्टी के पुराने नेता युवाओं को आगे बढ़ने से रोकते रहे हैं। इससे नाराज होकर एमपी में युवा नेता माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी, तो राजस्थान में सचिव पायलट भी अपना विरोध जाहिर कर चुके हैं। इन सबके बावजूद चाहे राजस्थान में पायलट की बगावत हो या फिर पंजाब में कांग्रेस विवाद। इन सभी मामलों को सुलटाने में पार्टी आलाकमान ने हरीश रावत को जिम्मेदारी सौंपी। वहीं, हरीश रावत अपने ही राज्य उत्तराखंड में हरीश रावत अपने अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए जूझ रहे हैं। ऐसे में हरीश रावत के ट्विट को सिर्फ हुंकार के रूप में देखा जाना चाहिए या फिर सियासी ब्लैकमेल।
राहुल गांधी नाराज, दिल्ली किया तलब
सूत्र तो बताते हैं कि हरीश रावत ने ये ट्वीट सोच-समझ के किए हैं। आला कमान की आँख-कान खोलना इसका मकसद है। इस मकसत में वह कामयाब होते भी दिख रहे हैं। हरीश रावत, पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल और अन्य सभी प्रमुख नेताओं को राहुल गांधी ने दिल्ली बुला लिया है। हो सकता है कि प्रीतम को भी बातचीत और मनभेद खत्म करने के लिए बुलावा आ गया हो। या फिर बुलाया जा सकता है।

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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