Recent Posts

Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Recent Posts

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

January 11, 2026

मनरेगा को कमजोर करने के खिलाफ कांग्रेस का अभियान जारी, देहरादून महानगर अध्यक्ष डॉ. गोगी ने कही ये बात

केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा योजना का नाम बदलने और इस योजना में केंद्र का अंशदान कम करने को विपक्षी दल इस योजना को कमजोर करने की साजिश बता रहे हैं। विरोध स्वरूप कांग्रेस ने देशव्यापी अभियान चला रखा है। साथ ही इस योजना को जमजोर करने की केंद्र की साजिश के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उत्तराखंड में देहरादून महानगर कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर करने की मंशा के खिलाफ कांग्रेस की ओर से घोषित देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ केवल एक योजना की लड़ाी नहीं है, बल्कि करोड़ों गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के काम के अधिकार की रक्षा की लड़ाई है। एक बयान में उन्होंने कहा कि मनरेगा की बुनियाद तीन मूल सिद्धांत पर रखी गई थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

तीन मूल सिद्धांत
1.रोज़गार का अधिकार: जो भी व्यक्ति काम की मांग करे, उसे रोजगार देना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी थी।
2.गांवों की स्वायत्तता: गांव अपने विकास कार्यों का निर्णय स्वयं ग्राम सभा और पंचायतों के माध्यम से करते थे।
3.केंद्र सरकार की पूर्ण जिम्मेदारी: मजदूरी का पूरा भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था और सामग्री लागत का 75 प्रतिशत केंद्र वहन करता था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सोची समझी साजिश
डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि मनरेगा एक अधिकार आधारित कानून था, जिसने संकट के समय ग्रामीण भारत को संबल दिया। वहीं, केंद्र सरकार द्वारा लाया गया वीबी ग्राम जी कानून मनरेगा को समाप्त करने की एक सोची-समझी साजिश है। इस नए कानून के तहत रोजगार अब अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर हो जाएगा। इससे पंचायत व्यवस्था और 73वें संविधान संशोधन की भावना को गहरा आघात पहुंचेगा। डॉ. गोगी ने आरोप लगाया कि अब मोदी जी मनरेगा को केंद्रीकृत नियंत्रण का औज़ार बनाना चाहते हैं। इस योजना से राज्यों पर डाला जा रहा बोझ डाला जा रहा है, साथ ही बजट में केंद्र अपनी जिम्मेदारी कम कर रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

1.बजट, योजनाएं और नियम सब कुछ दिल्ली से तय किए जाएंगे।
2.राज्यों पर 40 प्रतिशत तक का आर्थिक बोझ जबरन डाला जाएगा।
3.जैसे ही फंड खत्म होंगे या कटाई–बुआई के मौसम में, मजदूरों को महीनों तक रोजगार से वंचित किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

छीने जा रहे हैं पंचायतों के अधिकार
उन्होंने कहा कि पंचायतों से निर्णय लेने का अधिकार छीनकर सब कुछ केंद्र में समेटा जा रहा है। इससे ग्राम सभाएं और पंचायतें केवल आदेश पालन करने वाली संस्थाएं बनकर रह जाएंगी। ठेकेदार प्रथा पीछे के दरवाज़े से वापसी होगी। बायोमेट्रिक और जटिल प्रक्रियाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार से बाहर करने की साजिश की जा रही है। डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि देहरादून महानगर कांग्रेस इस आंदोलन में पूरी मजबूती से भाग लेगी और पंचायत से लेकर सड़क और सदन तक मनरेगा और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मजदूरी में अपना हिस्सा घटाकर राज्यों पर आर्थिक बोझ डालना संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। राज्य सरकारों की सहमति के बिना वित्तीय जिम्मेदारी तय करना संविधान के अनुच्छेद 258 का उल्लंघन है, जिसे कांग्रेस न्यायालय में चुनौती देगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह बदलाव मनरेगा की आत्मा पर सीधा हमला है और गरीब, मजदूर तथा ग्रामीण भारत के अधिकारों को छीनने की कोशिश है। कांग्रेस मनरेगा को कमजोर नहीं होने देगी। पार्टी की स्पष्ट मांग है कि वीबी–ग्राम–जी कानून को तत्काल वापस लिया जाए, मनरेगा को पुनः अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल किया जाए तथा पंचायतों और श्रमिकों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित किए जाएं।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed