कांग्रेस उपाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार ने भ्रष्टाचार व लोकायुक्त पर सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री को बताया खनन प्रेमी और घोषणावीर
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सलाहकार सुरेन्द्र कुमार ने भ्रष्टाचार व लोकायुक्त पर सरकार को घेरा। उन्होंने मुख्यमंत्री को खनन प्रेमी व घोषणावीर बताते हुए जमकर हमला बोला।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सलाहकार सुरेन्द्र कुमार ने भ्रष्टाचार व लोकायुक्त पर सरकार को घेरा। उन्होंने मुख्यमंत्री को खनन प्रेमी व घोषणावीर बताते हुए जमकर हमला बोला। कांग्रेस मुख्यालय में हुई प्रेसवार्ता में उन्होने भाजपा सरकार के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के राज्य को लोकायुक्त की आवश्यकता नही है, संबंधि बयान पर मुख्यमंत्री धामी से सवाल पूछे।उन्होंने कहा कि वह बताएं कि लोकायुक्त पर उनका क्या स्टैंड क्या है। क्या वह शिक्षा मंत्री के बयान से सहमत है। क्या 2017 विधानसभा चुनाव भाजपा के घोषणा पत्र में सरकार बनते ही लोकायुक्त देने वादा जनता के साथ धोखा था। क्या भाजपा ने अपने घोषणा पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। या अपने घोटालेबाजों को बचाने के लिये किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सबको याद है कि हरीश रावत के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से राज्यभवन भेजे गए लोकायुक्त कानून की अकाल हत्या राजभवन में की गई है।
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष व सलाहकार ने भाजपा के एक प्रवक्ता की ओर से कांग्रेस के घोटालों की बात कहने पर उल्टा भाजपा सरकार को कठघरें में खड़ा कर दिया है। उन्होने कहा कि विधानसभा के सत्र में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष ने आपदा का हत्यारा किसे कहा था। सन ऑफ सरदार, पाली हाऊस घोटाला, जिस पर कि भाजपा ने तीन दिन तक विधानसभा नही चलने दी थी, वो कौन नेता लोग थे। क्योंकि जिन लोगों पर भाजपा नेताओं ने आरोप लगाये थे, वह तो सब भाजपा को सुशोभित करने वाले नेता व मंत्री है। सरकार में विराजमान हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी को दिल्ली राष्ट्रपति भवन जाकर 419 घोटालों के आरोप भाजपा के मुख्यमंत्रियों व सरकार पर लगाने वाले भी अब भाजपा में ही विराजमान है। उन्होने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि हमारे मित्रगण चाहेंगे तो वो 419 घोटालों की फेरिस्त उनको भेजा जा सकती है। चाहें तो सोशल मीडिया, टीवी चैनल व चौराहें पर दन घोटालों पर डिबेट के लिए वह तैयार है। क्योंकि उनके केन्द्रीय गृहमंत्री भी चौराहे पर दो दो हाथ करना चाहते है।
उन्होने राज्य स्थापना दिवस 9 नवम्बर को मुख्यमंत्री की घोषणाओं को हरीश रावत के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से चलाई गई विभिन्न योजनाओं को नाम बदल कर घोषणा करने का आरोप भी लगाया है। कहा कि मुख्यमंत्री जी घोषणावीर हो गये है। क्योंकि उन्हें पता ही नही कि जिन योजनाओं को अपना बता रहे है वो तो पहले से ही चल रही योजनायें हैं। इसमें मात्र नाम बदला गया है। साथ ही उन्होने आन्दोलनकारी व अन्य पेंशन योजनाओं को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार आते ही इनको बढ़ोत्तरी की जायेगी।



