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July 12, 2026

कांग्रेस उपाध्यक्ष धस्माना ने कहा- इंजेक्शन हैं नहीं, फिर ब्लैक फंगस तैयारी का ढोंग क्यों, सीएम को भेजा पत्र

उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राज्य के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को पत्र भेजकर उनसे कहा कि जब राज्य में ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस के उपचार के लिए आवश्यक दवा व इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं है तो सरकार इसे बाकायदा महामारी घोषित करने का ढोंग क्यों कर रही है।

उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राज्य के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को पत्र भेजकर उनसे कहा कि जब राज्य में ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस के उपचार के लिए आवश्यक दवा व इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं है तो सरकार इसे बाकायदा महामारी घोषित करने का ढोंग क्यों कर रही है।
विदित हो कि कल इसी मुद्दे पर विभिन्न अस्पतालों में ब्लैक फंगस का इलाज करवा रहे मरीजों के तीमारदारों ने धस्माना से इंजैक्शन न मिलने की शिकायत की ती। इस पर धस्माना सीएमओ दफ्तर में नोडल अधिकारी के यहां पहुंचे। नोडल अधिकारी डॉक्टर कैलाश गुंज्याल ने उन्हें बताया कि चार दिन पहले 20 इन्जैक्शन आये थे, जो खत्म हो हो गए थे। उसी दिन से अब इंजैक्शन नहीं हैं। इसके बाद नाराज धस्माना सीएमओ के दफ्तर में ही धरने पर बैठ गए थे। फिर डीजी हैल्थ डॉक्टर तृप्ति बहुगुणा की ओर से दो तीन दिन में इंजैक्शन आने के आश्वासन के बाद वे धरने से उठे।
आज मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी आपका ध्यान कोविड मरीजों में पाए जाने वाले ब्लैक व व्हाइट फंगस के उपचार व बीमारी के इलाज के लिए मरीज को दिए जाने वाले इंजैक्शन की अनुपलब्धता की ओर आकृष्ट करना चाहती है। जैसा कि राज्य सरकार ने ब्लैक फंगस को भी महामारी घोषित कर दिया है और इसकी दवा तथा इंजैक्शन के लिए नोडल अधिकारी की तैनाती व मरीज को उपलब्ध कराई जाने की प्रक्रिया की एसओपी भी जारी कर दी है। इसके बावजूद हकीकत यह है कि जारी की गई एसओपी से मरीज के तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी परेशानी है कि राज्य में आज पिछले तीन दिनों से इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं हैं और मरीज अस्पतालों में तड़प रहे हैं व मर रहे हैं। उनके तीमारदार दर दर भटक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी तो घोषित कर दिया, किन्तु उसके उपचार में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन जो मरीज के वजन के प्रति दस किलो एक डोज की आवश्यकता पड़ती है, राज्य भर में उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में सरकार की क्या तैयारी है। इंजेक्शन के अभाव में इस महामारी से लड़ने की बात समझ से परे है। ऐसा प्रतीत होता है कि तैयारी के नाम पर केवल ढोंग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी संबंध में राज्य के मुख्य सचिव ओम प्रकाश का आज एक बयान प्रेस में छपा है जिसमें वे कह रहे हैं कि ब्लैक फंगस का इलाज निजी अस्पताल में नहीं होगा। हमारा आपसे अनुरोध भी है और मांग भी है कि सरकार ब्लैक फंगस को केवल कागजों और घोषणाओं में महामारी न मान कर उसका उपचार महामारी के तौर पर करने के पुख्ता इंतजाम करे। राज्य में ब्लैक फंगस के उपचार के लिए पर्याप्त दवाएं व इंजैक्शन की व्यवस्था कर व इसकी उपलब्धता उपचार करने वाले अस्पताल से ही करवाये। हमारा यह भी आग्रह है कि कोविड-19 की दूसरी लहर को सरकार अभी समाप्त न माने व पर्वतीय जनपदों में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक टेस्टिंग करवाये। हमें भरोसा है कि इस सम्बंध में आप तत्काल कार्यवाही कर संबंधित अधिकारियों को आदेशित करने का कष्ट करेंगे।