हे नीलकण्ठं, हे शितिकण्ठ। हे गंगाधर, हे अत्यन्तकठोर ।। तुम भक्ति मात्र से हो जाते विभोर हे मृत्युंजय, हे व्योमेश।...
युवमंच
ए-वक़्त ख़ुद पर इतना ग़ुरूर न कर तू वक़्त ही तो है, वक़्त तू भी वक़्त एक वक़्त पर बदल...
कुछ बाते हैं जज्बातो की चलो आज कहती हूँ एक किरदार जो खास हम सबके लिए चलो आज उसके बारे...
बदलते वक्त के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आज कई नए विकल्प सामने आए हैं। इन्हीं में एक है हॉस्पिटल...
सूखे पत्ते कहते हैं सूखे पत्ते कहते हैं, सूख गया सो झड़ गया, अपनो से बिछड़ गया, पतझड़ के मौसम...
बदला क्या है? बदला क्या है? कुछ भी तो नही! वही फीके चेहरे, वही तीखे तेवर, वही दिखावटी रिश्ते, वही...
नौ दिसंबर 2020 को लोकसाक्ष्य के माध्यम से युवा लेखिका एवं कवयित्री किरन पुरोहित ने अलकनंदा नदी को पत्र लिखा...
कैसे गद्दारों और मक्कारों की कामयाब ये चाल हुई। बही थी नदिया शोणितों की और धरा भी लाल हुई। क्षत...
अगर कभी-भी नहीं मिले तो अगर कभी कुछ कहा नहीं तो - बात कैसे है ? अगर कभी कुछ सुना...
बौणूमां आग ना रो हिलासी, बौण की । पीर सुण्योणी तेरी, भौण की।। बौण बचौण, आला क्वी । तेरी हर्याली...
