अब गली मोहल्लों में छोटा रोजगार करने वालों पर बुलडोजर की तैयारी, एमडीडीए भेज रहा नोटिस, मोहित डिमरी ने की राज्यव्यापी नीति बनाने की मांग

उत्तराखंड में सरकार भले ही गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेहतर स्कूल सहित अन्य समस्याओं को दूर करे या ना करे, लेकिन सरकार का चाबुक उन लोगों पर चलने लगा है, जो इन विपरीत परिस्थितियों में अपने घर परिवार का खर्च चलाने में अपना छोटा सा सहयोग दने में सहायक हो रहे हैं। अब ऐसे लोगों पर सरकार की नजर पड़ गई है। देश के बड़े सेठों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा हो रहा है, या फिर कोई और मकसद है। ये हमें पता नहीं, लेकिन सच ये है कि इस बार निशाना गली-गली और मोहल्लों के छोटे दुकानदार आ गए हैं। वो भी उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में। बड़ा तबका परेशान है। इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि चुनाव में तो एसआईआर का योगदान हो जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये है मामला
इन दिनों देहरादून में गली मोहल्लों के छोटे दुकानदार को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस दिए जा रहे हैं। इसमें कहा जा रहा है कि उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम 1973 की धारा 27 (1) के अधीन नोटिस दिया गया है। लब्बोलुबाब ये है कि घर में दुकान बनाना अवैध है। आप अर्थदंड के भागी भी हो सकते है, जो 50000 (पचास हजार रूपये) तक हो सकता है। ये काम जारी रहने वाले अपराध की दशा में अतिरिक्त अर्थ दंड जो उस उस प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसा अपराध उसके प्रथम दोषसिद्ध होने के पश्चात जारी रहता है तो दो हजार पाच सौ रूपये प्रतिदिन हो सकेगा। इसके लिए दण्डनीय हो सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस तरह से डरा रहे लोगों को
नोटिस में लिखा गया कि आपका ध्यान उक्त अधिनियम की धारा 26 (3) की ओर दिलाया जाता है। जिसकी अधीन आप जैसे व्यक्ति जो उपरोक्त अधिनियम की धारा 25 के अधीन किसी भूमी या भवन भवन में में प्रवेश प्रवेश पाने को अधिकृत हैं, के प्रवेश में बाधा डालता है अथवा ऐसे प्रवेश के पश्चात ऐसे व्यक्ति को उत्पीड़ित करते है तो आप कारावास से जिसकी अवधी छह मॉस तक हो सकती है या जुरमाना रुपये एक हजार तक का हो सकता है अथवा दोनों के दंडनीय होंगे। लोकसाक्ष्य का मानना है कि मोहल्लों की दुकानों पर तालाबंदी की तैयारी शुरू हो चुकी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मोहल्लों की दुकानों का योगदान
जिसे सरकार अवैध बता रही है, वे लोग हर मोहल्ले में छोटी छीटी जरूरतों को पूरा करने में अपना योगदान दे रहे हैं। यदि गली और मोहल्लों में घर घर में लोगों की जरूरत का सामान खरीदने का विकल्प बंद हो जाएगा तो समझिए कि आप कितनी परेशानी में पड़ सकते हो। कई दशकों से ऐसी दुकानें आसपास के लोगों को हर छोटी से बड़ी वस्तु खरीदने का केंद्र हैं। दो ए को फायदा पहुंचाने के लिए अब इन पर भी तलवार लटका दी गई है। अब छोटे व्यापारियों को बोला जा रहा है कि वे अवैध हैं। यानी बेरोजगारी को और बढ़ावा देने का खेल शुरू हो गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उठाई आवाज
उत्तराखंड में आवासीय भवनों के सीमित हिस्सों में छोटी दुकानें और अन्य लघु व्यवसाय संचालित करने वाले स्थानीय लोगों की आजीविका का मुद्दा उठाते हुए मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राज्यव्यापी नीति बनाने की मांग की है। समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों में भूमि उपयोग संबंधी नियमों की समीक्षा करने तथा प्रभावित छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कानून के दायरे में व्यावहारिक समाधान तलाशने का आग्रह किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
डिमरी ने कहा कि देहरादून सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों और कस्बों में अनेक स्थानीय परिवार अपने घर के सीमित हिस्से में किराना दुकान, बुटीक, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, स्टेशनरी, मोबाइल रिपेयरिंग, सैलून और अन्य छोटे व्यवसाय चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। हाल के दिनों में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की ओर से कुछ व्यवसायों के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने और संभावित सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर कारोबारियों में चिंता है। यह विषय केवल देहरादून तक सीमित न रहकर प्रदेश के अन्य नियोजित क्षेत्रों में भी प्रासंगिक हो सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में स्वरोजगार अनेक परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। किसी छोटी दुकान से होने वाली आय बच्चों की शिक्षा, घर के राशन, बुजुर्गों की दवाइयों और अन्य जरूरी खर्चों में काम आती है। ऐसे में नियमों के पालन के साथ-साथ स्थानीय परिस्थितियों और छोटे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मिक्स्ड लैंड यूज की नीति बनाने पर जोर
समिति ने मांग की है कि राज्य सरकार आवासीय क्षेत्रों में छोटी दुकानों और कम यातायात उत्पन्न करने वाले उपयुक्त व्यवसायों के संचालन के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित करने की संभावनाओं का परीक्षण करे। इसके तहत भवन के क्षेत्रफल, सड़क की चौड़ाई, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मिक्स्ड लैंड यूज यानी आवासीय एवं व्यावसायिक उपयोग की संतुलित व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
डिमरी ने कहा कि MDDA सहित प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और अन्य नियोजित क्षेत्रों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों के मास्टर प्लान और लागू नियमों की समीक्षा के बाद स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि कारोबारियों को यह पता हो कि किन परिस्थितियों में और किन शर्तों के तहत व्यवसाय संचालित किया जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नोटिसों की निष्पक्ष समीक्षा और सुनवाई का अवसर देने की मांग
ज्ञापन में आवासीय भवनों के सीमित हिस्सों में व्यवसाय संचालित करने वाले लोगों को जारी कारण बताओ नोटिसों की निष्पक्ष समीक्षा करने तथा प्रत्येक मामले में स्वीकृत भवन मानचित्र, भूमि उपयोग, व्यवसाय की प्रकृति और सुरक्षा मानकों के आधार पर निर्णय लेने की मांग की गई है। समिति ने यह भी आग्रह किया है कि समीक्षा और नीति निर्धारण की अवधि में पात्र मामलों में सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई स्थगित रखने की संभावनाओं पर लागू कानून और न्यायालयों के आदेशों के अनुरूप विचार किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
समिति ने कहा कि जहां कानून अनुमति देता है, वहां पात्र कारोबारियों को सरल एवं समयबद्ध अनुमति अथवा नियमितीकरण का अवसर देने की संभावनाएं तलाश की जानी चाहिए। वहीं, सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण, गंभीर सुरक्षा उल्लंघन और कानूनन नियमित न किए जा सकने वाले निर्माणों पर लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सरकार, प्राधिकरणों और व्यापारियों के बीच बैठक कराने की अपील
मोहित डिमरी ने मुख्यमंत्री से संबंधित विभागों, विकास प्राधिकरणों, स्थानीय निकायों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित कर समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य अवैध निर्माण को संरक्षण देना नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों की समस्याओं का कानूनी और न्यायसंगत समाधान तलाशना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस जनहित के विषय पर शीघ्र संज्ञान लेकर प्रदेश के छोटे कारोबारियों और स्वरोजगारियों के हित में स्पष्ट नीति एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



