अंकिता भंडारी हत्याकांडः बीआईपी को संरक्षण देने की राजनीति के खिलाफ सीपीएम का प्रदर्शन, सरकार का पुतला दहन
उत्तराखंड में अंकिता हत्याकांड के मामले में वीआईपी संलिप्तता के खिलाफ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी ) ने विरोध जलूस निकाला। साथ ही तथा राज्य सरकार पर दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। इस दौरान राज्यभर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत की राजनीति को संरक्षण देने के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। साथ ही प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पार्टी से जुड़े लोगों ने देहरादून में राजपुर रोड स्थित सीटू कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अंकिता हत्याकांड में संलिप्त बीआईपी को भाजपा सरकार एवं भाजपा के उच्च पदस्थ लोगों का संरक्षण प्राप्त है। भाजपा के उच्चपदस्थ पदाधिकारीगणों में जिसे वीआईपी के नाम जाना जाता रहा है, अंकिता हत्याकांड के प्रकरण में उसका नाम सामने आ गया है। ऐसे लोगों के खिलाफ कानून सम्मत कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर वक्ताओं ने कहा है कि राज्य में सरकारी संरक्षण में कुछ साम्प्रदायिक तत्व जगह जगह अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को तरह तरह से उत्पीड़ित कर रहे हैं। अनेक स्थानों में उन्हें रोजगार से वंचित कर रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत राज्य हरेक व्यक्ति की रोजी रोटी की सुरक्षा के लिये राज्य जबाबदेह होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके विपरीत राज्य की भूमिका एकदम उलट है। यहाँ राज्य यानि सरकार की भूमिका न्यायोचित नहीं है। अनुच्छेद 21 में हर व्यक्ति को जीवन यापन का अधिकार देता है। यदि उसकी रोजी रोटी कमाने में कोई बाधक बनता है तो राज्य ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करेगा। पीड़ित के शान्तिपूर्ण जीवन जीने का वातावरण सुनिश्चित करेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस उपद्रवियों को रोकने के बजाय मूकदर्शक बने रहते हैं। पुलिस के पास उपद्रवियों की वीडियोग्राफी होने के बावजूद भी उपद्रव का मुकदमा अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखा जाता है। ऐसे में अल्पसंख्यकों में भय का माहौल है। उन्हें उनके रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है। अंकिता भंडारी जधन्य हत्याकांड जैसी शर्मनाक घटनाओं में सत्ताधारी दल के लोगों का नाम सामने आना भी चिंताजनक है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा है कि सीपीआईएम अंकिता मुद्दे पर एवं राज्यभर में अल्पसंख्यको के खिलाफ हो रही नफरत की राजनीति के खिलाफ व्यापक संघर्ष करेगी। प्रदर्शन करने वालों में पार्टी की केन्द्रीय कमेटी के सदस्य राजेन्द्र सिंह नेगी, राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित, जिला सचिव शिवप्रसाद देवली, देहरादून सचिव अनन्त आकाश, सचिव मंडल सदस्य लेखराज, एसएस नेगी, मनमोहन रौतेला, भगवन्त पयाल, शैलेन्द्र परमार, नुरैशा अंसारी, कनिका, बिन्दा मिश्रा, प्रेंमा, सुमित्रा रावत, रविन्द्र नौडियाल, सोनूकुमार, नरेन्द्र सिंह, आशु नेगी, पीयूष, यूएन बलूनी, साहिल, गुरू प्रसाद,
आनन्दमणी आदि शामिल थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक)[3], अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब अचानक इस मामले में नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने इस नाम को उजागर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



