Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

February 10, 2026

उपलब्धिः एक बार में चार ब्रेन एन्यूनिज्म का एंडोवास्कुलर कॉइलिंग से हिम्स में किया गया सफल आपरेशन

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के डॉक्टरों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए असंभव से दिखने वाले आपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों की टीम ने एक साठ वर्षीय महिला के दिमाग में मौजूद चार ब्रेन एन्यूरिज्म (गुब्बारे जैसी सूजन) को सिर्फ एक ही बार में एंडोवास्कुलर कॉइलिंग तकनीक से सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हिम्स जौलीग्रांट के न्यूरोसर्जन डॉ. बृजेश तिवारी ने बताया कि एक 60 वर्षीय महिला उनकी ओपीडी में आंखों के पीछे दर्द, दोहरा दिखाई देना, गर्दन में अकड़न की समस्या को लेकर आई। इसकी जांच कराने पर पता चला कि महिला के दिमाग के दांए और बाएं नसों में चार जगह गुब्बारे जैसी सूजन (एन्यूरिज्म) आ गई थी। ये सूजनें इतनी खतरनाक होती हैं कि अगर ये फट जाएं, तो दिमाग में खून बहना शुरू हो जाता है और तुरंत मौत हो सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डॉक्टरों ने ऐसे किया इलाज
चिकित्सकों के लिए दिमाग के दांए और बांए नसों में मौजूद एक साथ चार एन्यूरिज्म का इलाज करना बहुत बड़ा और जोखिम भरा काम था। डॉ. बृजेश तिवारी ने बताया कि ब्रेन में मौजूद एन्यूरिज्म के ईलाज के लिए एंडोवास्कुलर कॉइलिंग तकनीक का प्रयोग किया गया। इस तकनीक में मरीज़ की जांघ से एक बहुत पतली नली (कैथेटर) डालकर उसे धीरे-धीरे दिमाग तक ले गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

फिर इस नली के ज़रिए चारों खतरनाक एन्यूरिज्म में प्लैटिनम के बहुत महीन तार (कॉइल) भर दिए। तार से एन्यूरिज्म को अंदर से बंद कर दिया। जिससे उनमें खून जाना रुक गया और फटने का खतरा खत्म हो गया। डॉ. बृजेश तिवारी के नेतृत्व में विभागाध्यक्ष डॉ. रंजीत कुमार की न्यूरोसर्जिकल निगरानी में डॉ. संजीव पाण्डे, डॉ. अंकित भाटिया, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मोहित, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. निरूपा ने बेहतर सामंजस्य के साथ इस आपरेशन का सफलतापूर्वक अंजाम दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डॉ. बृजेश तिवारी ने बताया कि आमतौर पर ब्रेन में एक से ज्यादा एन्यूरिज्म का ईलाज अलग-अलग सत्र में किया जाता है। जिसमें मरीज को बार-बार बेहोश करना पड़ता है और यह प्रक्रिया जोखिम भरी होती है, लेकिन एक ही बार में एन्यूरिज्म के ईलाज करने से मरीज को बार-बार ऑपरेशन और बेहोश करने के जोखिम से बचाव हो जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने बताया कि महिला अब पूरी तरह से ठीक हो रही है और सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। इस सफलता ने हिमालयन अस्पताल को इस तरह के जटिल और जानलेवा न्यूरो-ऑपरेशनों के लिए देश के प्रमुख केंद्रों में स्थापित कर दिया है। एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने न्यूरोसर्जन विभाग सहित पूरी टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *