राज्य आंदोलनकारियों के आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और दलों का समर्थन, 10 जुलाई को घेरेंगे सीएम आवास
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी आरक्षण सहित कई मांगों को लेकर पांच जून से देहरादून में शहीद स्मारक स्थल पर धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि बार बार आश्वासन के बावजूद उनकी प्रमुख मांग दस फीसद क्षैतिज आरक्षण को लेकर सरकार टालमटोल कर रही है। इस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं, राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण को दोबारा से शुरू करने की मांग पर भी सरकार ने चुप्पी साधी हुई है। हाल ही में आंदोलनकारियों ने 10 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास घेरने का निर्णय किया था। इसे विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने समर्थन दिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आज शहीद स्मारक स्थल देहरादून में उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद की बैठक में कई सामाजिक संगठन व राजनीतिक दल से जुड़े लोग शामिल हुए। इसमें उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के संरक्षक नवनीत गुसाईं, प्रदेश अध्यक्ष विपुल नौटियाल, जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार ने प्रमुख मांगों 10% क्षैतिज आरक्षण, मूल निवास, चिह्नीकरण, पेंशन पट्टा, धारा 371 को लेकर विभिन्न संगठनों व राजनीतिक दलों के साथ मिलकर चर्चा की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर हल्द्वानी से भी कुछ लोग शामिल हुए। सभी ने 10 जुलाई को सीएम आवास के घेराव का पूर्ण समर्थन किया। साथ ही प्रदेशवासियों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में भागीदारी की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार आंदोलनकारियों की मांगे नहीं मानती तो आंदोलनकारी व सामाजिक संगठन उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक निर्मला बिष्ट, नेताजी संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल, कांग्रेस नेता सुरेंद्र अग्रवाल, उत्तराखंड क्रांति दल से विजेंद्र रावत, जनवादी महिला संमिति से इन्दु नौडियाल, सीटू से लेखराज, सीपीएम से अनंत आकाश, संयुक्त मंच से कांति कुकरेती, राज्य आंदोलनकारी अंबुज शर्मा, राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी से बालेश बवानिया, जगमोहन रावत, संदीप पटवाल, सुशीला भट्ट, राजेश पांथरी, जगमोहन रावत, पुष्प लता वैश्य, नरेंद्र नेगी, जीती चौहान, रामपाल, सुशील विरमानी, सुखबीर चौहान, लाखन चिलवाल आदि शामिल रहे।
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