अंकिता हत्याकांड और नौकरियां बेचने पर भी दो शब्द बोलें पीएम मोदी, पीठ का स्वास्तिक के निशान पर गणेश गोदियाल के सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के उत्तराखंड दौरे पर हैं। उन्होंने आज पहले केदारनाथ धाम पहुंचकर पूजा अर्चना की और कई योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके बाद वह बदरीनाथ धाम चले गए। पीएम मोदी के दौरे को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कुछ सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री की ड्रेस को लेकर भी स्वास्तिक के चिह्न पर अपना ऐतराज जताया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)देहरादून में उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में गणेश गोदियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का उत्तराखंड में स्वागत और अभिनंदन है। वो 125 करोड देशवासियों के पीएम हैं। हम सबकी पूजा भी उनकी पूजा में शामिल है। साथ ही भगवान से कामना है कि इसे स्वीकार करें और हमें आशीर्वाद दें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों में अंकिता भंडारी हत्याकांड और नौकरियों को बेचने का कारोबार है। उम्मीद करता हूं कि प्रधानमंत्री जी अपने श्रीमुख से इन दोनों विषयों पर खुलकर बात रखेंगे। दोषियों पर कार्रवाई के आदेश देंगे। अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल लोगों को कठोर से कठोर सजा का प्रावधान करेंगे। अंकिता हत्याकांड के लिए जिम्मेदार जो तथाकथित वीआइपी हैं, उसे उत्तराखंड में घसीटकर लाकर जनता के सामने पेश करने के आदेश देंगे। नौकरियो को बेचने का कारोबार जो उनके मंत्री कर रहे हैं उन्हें बर्खास्त करने के आदेश देंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्रीजी ने जो वस्त्र पहने हैं, उसके मैकर ने स्वास्तिक का निशान पीठ पर बनाया है। जिसने भी ड्रेस बनाई, उससे निवेदन है कि प्रधानमंत्री की शाबाशी पाने के लिए ऐसा काम ना करें कि प्रधानमंत्रीजी की पीठ पर स्वास्तिक का निशान ना बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि पीएम की टोपी पर ये निशान होता तो हमें अच्छा लगता। हमारे लिए ये श्रद्धा का चिह्न है। भगवान गणेश के रूप में हम स्वास्तिक के चिह्न को देखते हैं। ये निशान पीठ पर हो, ये शोभा नहीं देता। ऐसी ड्रेस बनाने वालों से मेरा अनुरोध है कि इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसे कैसी ड्रेस पहननी है ये स्वतंत्रता है, लेकिन धार्मिक चिह्नों को पीठ पर लगाना सही नहीं है।

Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


