दिन में नेता जुटा रहे भीड़, एमपी में नाइट कर्फ्यू, उत्तराखंड में हो सकता है विचार, सवाल-क्या कोरोना रात को हमला करता है
कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों से उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। जहां कुछ दिन पहले उत्तराखंड में दस से पंद्रह तक कोरोना के नए केस मिल रहे थे, अब एकाएक उसमें वृद्धि होने लगी है।
कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों से उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। जहां कुछ दिन पहले उत्तराखंड में दस से पंद्रह तक कोरोना के नए केस मिल रहे थे, अब एकाएक उसमें वृद्धि होने लगी है। गुरुवार को ही उत्तराखंड में कोरोना के नए 39 केस मिले। यही नहीं, देहरादून में ओमिक्रॉन का भी केस मिल चुका है। ऐसे में प्रदेश सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत नाइट कर्फ्यू लगाने पर विचार किया जा सकता है। एक बात आज तक समझ नहीं आ रही है कि उत्तराखंड में रात के समय कहां ज्यादा भीड़ जमा हो रही है। भीड़ तो दिन में नेता जमा कर रहे हैं। दिन में भीड़ जुटाओ और रात को कर्फ्यू लगाओ, तो क्या कोरोना थम जाएगा। क्या कोरोना का हमला रात को ही होता है। जो दिन में हमला नहीं करेगा। दिन के समय के हालात को बहुत खराब हैं। आगामी चुनाव के मद्देनजर रैलियों और जनसभाओं का दौर चल रहा है। सीएम उद्घाटन और शिलान्यास के बहाने भीड़ जुटा रहे हैं। वहीं, दूसरे राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार आरंभ कर दिया है। अब तो उत्तराखंड का ऐसा कोई जिला ही शायद बचा हो, जहां किसी दिन किसी राजनीतिक दल की रैली न हो रही है। बेहतर ये होता कि इन रैलियों में नेता मास्क बांटते। खुद मास्क लगाते और उदाहरण पेश करते। साथ ही दूसरों को भी मास्क के लिए प्रेरित करते। सड़कों पर होर्डिंग लगाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने वाले इन नेताओं के पास मास्क बांटने के लिए पैसा नहीं है।न नेता और न जनता लगा रही मास्क
रैलियों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो भी चिंताजनक हैं। न तो नेता ही मास्क लगा रहे हैं और न ही नेता को सुनने वाले। भीड़ में अंगुली भर गिनने लायक ही लोग मास्क में दिखते हैं। सीएम हों या फिर मंत्री। या फिर विपक्षी दलों के नेता। व्यापारी, सामाजिक, धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग। सभी बगैर मास्क के नजर आने लगे हैं। यहां तक मास्क की सलाह देने वाले अधिकारी, चिकित्सक तक भी कई बार बगैर मास्क के ही दिख रहे हैं। ऐसे में जब सरकार के नुमाइंदे मास्क नहीं लगाएंगे तो आम जनता पर क्या संदेश जाएगा।
उत्तराखंड में लग सकता है नाइट कर्फ्यू
देश में कोरोना के ओमिक्रोन वेरिएंट का केस मिलने के बाद सरकार व शासन सतर्क हो गए हैं। मुख्य सचिव एसएस संधु की अध्यक्षता में पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश में नाइट कर्फ्यू व अन्य प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्री डा धनसिंह रावत ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखने के साथ ही प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
गुरुवार को मुख्य सचिव एसएस संधु की अध्यक्षता में शासन, स्वास्थ्य व पुलिस के अधिकारियों की बैठक हुई। इस दौरान उन्होंने समस्त जिलाधिकारियों व मुख्य चिकित्साधिकारियों को संक्रमण से बचाव के लिए ठोस कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पतालों में बेड, आक्सीजन व दवाइयों की समुचित व्यवस्था करने को कहा। इसके साथ ही कोविड टेस्टिंग तथा डोर टू डोर सर्वे को तीव्र गति से कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर दिन ओमिक्रोन वेरिएंट के संक्रमण संबंधी सभी पहलुओं पर विचार किया जाए।
एमपी में 37 दिन बाद फिर से नाइट कर्फ्यू
37 दिनों के बाद मध्यप्रदेश में फिर से रात का कर्फ्यू लागू हो गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि कोविड के मामलों में वृद्धि की आशंकाओं के बीच राज्य भर में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक रात का कर्फ्यू लागू होगा, क्योंकि देश भर में ओमिक्रॉन के मामले बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल प्रभाव से इसे लागू करने की बात कही है। मध्य प्रदेश में अब तक ओमिक्रॉन वैरिएंट का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है लेकिन सरकार ने ऐहतियात के तौर पर सख्त उपाय लागू करने का फैसला लिया है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हम रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक रात का कर्फ्यू लागू कर रहे हैं। यह चिंताजनक है कि महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में और मामले सामने आ रहे हैं। मध्यप्रदेश में भी 24 घंटे में 30 मामले पाए गए हैं। ओमिक्रॉन देश के 16 राज्यों में आ चुका है। इसके मध्यप्रदेश में भी आने की आशंका है। अगर पूरी दुनिया को देखें तो ओमिक्रॉन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए हालात को देखते हुए मुझे अंतरात्मा से लगता है कि हमें कोरोना की तीसरी लहर को रोकना है. हमें सारे जरूरी उपाय करना है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप देर न करें। मास्क जरूर पहनें। सोशल डिस्टेंस रखें। अनावश्यक भीड़ में न जाएं। वैक्सीन जरूर लगवाएं। अगर कोई अपने घर में संक्रमित हो जाता है, उसे अलग से रखने की जगह नहीं है, तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। हमने पहले ही तय कर लिया था कि स्कूल में जो हमारे बच्चे हैं वो 50 फीसद संख्या में ही जाएंगे। ताकी वहां सोशल डिस्टेंसिंग बनी रह सके।



