कोरोना के भेंट चढ़ा भारत तिब्बत व्यापार का प्रतीक गोचर मेला, प्रदेश भर में हो रहे मेले, आज के बदले चमोली में 20 को अवकाश
उत्तराखंड में चमोली जिले में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक गोचर मेला कोरोना की भेंट चढ़ गया। ये भी कितना हास्यास्पद है कि दूसरी तरफ प्रदेश भर में राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक आयोजनों में भीड़ जुटाई जा रही है और वहां कोरोना का कोई खतरा नहीं है।
उत्तराखंड में चमोली जिले में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक गोचर मेला कोरोना की भेंट चढ़ गया। ये भी कितना हास्यास्पद है कि दूसरी तरफ प्रदेश भर में राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक आयोजनों में भीड़ जुटाई जा रही है और वहां कोरोना का कोई खतरा नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी केदारनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देहरादून में मेले में, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा चमोली जिले के साथ ही उधमसिंह नगर जिले में जनसभाओं में भीड़ को संबोधित कर चुके हैं। धार्मिक आयोजन भी हो रहे हैं, लेकिन गोचर मेले से जिला प्रशासन को खतरा नजर आया।गोचर मेला भारत तिब्बत व्यापार के प्रतीक के तौर पर आयोजित किया जाता है। चमोली जिले के गोचर में इसका हर साल आयोजन होता है। इसका आयोजन छह दशक से भी ज्यादा समय से हो रहा है। इसके लिए चमोली जिले में पूर्व में सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया था। हाल ही में चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने एक आदेश जारी किया। इसमें 18 नवंबर के गोचर मेले के स्थानीय सार्वजनिक अवकाश के बदले 20 नवंबर को अवकाश घोषित किया है।
आदेश में तर्क दिया गया है कि कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर सावधानी एवं अहतियात बरतने के दृष्टिगत इस वर्ष गौचर मेला संभव नहीं है। ऐसे में मेले के लिए 18 नवंबर को घोषित स्थानीय अवकाश के स्थान पर स्थानीय जनभावनाओं की आस्था को देखते हुए श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के मौके पर जिले में स्थानीय अवकाश घोषित किया जाता है। इस अवकाश की मंशा ये भी है कि जिले के अधिक से अधिक लोग बदरीनाथ धाम पहुंचे और शीतकाल में कपाट बंद होने से पहले अंतिम दर्शन करें। अब यदि चमोली के लोग बदरीनाथ धाम की ओर रुख करते हैं तो क्या वहां कोरोना का डर नहीं रहेगा। जिलाधिकारी का उक्त आदेश प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।





