कोरोनावायरसः भारत में एंटीबॉडी कॉकटेल की एंट्री, 82 वर्षीय बुजुर्ग का सफल इलाज, 12 साल से ऊपर दी जा सकेगी

रोश इंडिया और सिप्ला लिमिटेड की एंटीबॉडी कॉकटेल अब भारत में उपलब्ध है। सेंट्रल ड्रग एंड स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में भारत में एंटीबॉडी कॉकटेल इसके लिए एक इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) दिया है। इसे दवा को अमेरिका और कई यूरोपीय यूनियन देशों में भी मंजूरी मिली है। इस दवा का भारत में सफल इलाज किया जा चुका है। 82 वर्षीय बुजुर्ग को ये दवा देने के बाद एक ही दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
ये दवा माइल्ड से मॉडरेट कोरोना संक्रमित मरीजों को दी जा सकती है। वयस्कों और 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को जो माइल्ड से मॉडरेट कोरोना के इलाज के लिए, जिन्हें गंभीर रोग विकसित होने का हाई रिस्क है और उन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मरीजों को एंटीबॉडी कॉकटेल (Casirivimab और Imdevimab) दिया जा सकता है। हाई रिस्क वाले मरीजों की स्थिति खराब होने से पहले ये देखा गया है कि उनका रिस्क कम हो जाता है। अस्पताल में भर्ती और मृत्यु दर 70 फीसद और लक्षणों की अवधि को चार दिनों तक कम हो जाता है।
भारत में पहला सफल इलाज
भारत में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का पहला सफल इलाज हुआ है। गुड़गांव स्थित अस्पताल में मरीज को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल की खुराक दिए जाने के एक दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। अस्पताल के अध्यक्ष डॉ नरेश त्रेहान ने बताया कि 82 वर्षीय एक व्यक्ति कई बीमारियों से ग्रसित थे। उन्हें मेदांता अस्पताल में खुराक देने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी हानिकारक रोगजनक वायरस से लड़ने की प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता की नकल करते हैं। ऐसा एंटीबॉडी कॉकटेल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दिया गया था जब वे कोरोना से संक्रमित हुए।
अमेरिका और यूपोप में हो रहा है इस्तेमाल
त्रेहान ने बताया कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का अमेरिका और यूरोप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। त्रेहान ने कहा कि (कोविड) संक्रमण के पहले सात दिनों में 70-80 प्रतिशत लोग, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल की जरूरत पड़ती थी, उन्हें यह कॉकटेल दिए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होगी।
मेदांता अस्पताल के डॉक्टर सत्य प्रकाश यादव ने ट्वीट किया कि आखिरकार कोरोना के इलाज के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल अब बाजार में उपलब्ध है। आज 82 वर्षीय कोविड संक्रमित मरीज का इससे इलाज किया गया। आशा करते हैं कि यह COVID-19 के अधिक रोगियों को ठीक करने में मदद करेगा। डॉ त्रेहन ने कहा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल से उपचार के बाद घर गए मरीज की निगरानी की जाएगी।
दो दवाओं का मिश्रण
दरअसल, एंटीबॉडी कॉकटेल दो दवाओं का मिश्रण, जो किसी वायरस पर एक जैसा असर करती हैं. यह कॉकटेल एंटीबॉडी दवा में कोरोना वायरस पर समान असर करने वाली एंटीबॉडीज का मिश्रण है। एंटीबॉडी-ड्रग कॉकटेल Casirivimab और Imdevimab को स्विस कंपनी Roche ने Regeneron के साथ मिलकर तैयार किया है। भारतीय कंपनी सिप्ला इसकी मार्केटिंग सहयोगी है। अभी देश में चुनिंदा जगहों पर ही यह एंटीबॉडी कॉकटेल मिल पाएगी। जैसे मेदांता अस्पताल से इसे लिया जा सकेगा।
हल्के और मध्यम लक्षणों वाली मरीजों का काफी कारगर है ये दवा
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश में कोरोना महामारी को लेकर जो हालात बन रहे थे, उसके मद्देनजर इसी माह के पहले सप्ताह में इसके इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी थी। तभी से ये कयास लगाए जा रहे थे की ये दवा जल्द ही भारतीयों के लिए उपलब्ध हो सकेगी। यूरोप और अमेरिका में इस दवा के इस्तेमाल को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। इस दवा के बारे में सामान्य भाषा में कहा जाए तो ये लैब में बनाए गए प्रोटीन हैं।
ये है कीमत
ये प्रोटीन वायरस से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम की क्षमता की कॉपी करते हैं, जिससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। खास बात ये है कि इस दवा का इस्तेमाल 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों पर भी किया जा सकता है। हालांकि इस दवा की कीमत फिलहाल काफी अधिक है। एक व्यक्ति के लिए इसकी कीमत 59750 रुपए होगी। जो आम आदमी के लिहाज से काफी ज्यादा कही जा सकती है।




