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October 24, 2026

उत्तराखंड में विश्वविद्यालय खोलना आसान, कॉलेज चलाना मुश्किल, सरकार की नीतियों पर डॉ. सुनील अग्रवाल ने उठाए सवाल

उत्तराखंड में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए स्थाई विन्यास निधि की बाध्यता समाप्त करने के कैबिनेट के प्रस्ताव ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रदेश की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से प्रदेश में विश्वविद्यालय खोलना तो आसान हो रहा है, लेकिन पिछले 25 वर्षों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे निजी कॉलेजों का संचालन लगातार मुश्किल होता जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यदि सरकार निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित पांच करोड़ रुपये की स्थाई विन्यास निधि की बाध्यता समाप्त कर सकती है, तो पुराने निजी कॉलेजों पर लागू सिक्योरिटी डिपॉजिट की अनिवार्यता पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही प्रदेश में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए अलग-अलग नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के वर्ष 2016 के नियमों के तहत निजी कॉलेजों में संचालित प्रत्येक परंपरागत पाठ्यक्रम के लिए 15 लाख रुपये तथा प्रत्येक व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए 35 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट संबंधित विश्वविद्यालय में जमा करने की व्यवस्था है। यह प्रावधान वर्ष 2016 से पहले स्थापित कॉलेजों पर भी लागू किया गया है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के कारण कई कॉलेजों को संबद्धता विस्तार के पत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि कुछ कॉलेजों ने इस नियम के विरुद्ध न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें स्थगन आदेश भी प्राप्त हुए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय, शासन और राजभवन के स्तर पर इस समस्या के समाधान की दिशा में अपेक्षित सकारात्मक पहल दिखाई नहीं दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

क्या पुराने कॉलेजों को बंद होने की स्थिति में पहुंचाना चाहती है सरकार
डॉ. सुनील अग्रवाल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की नीति का अप्रत्यक्ष संदेश यही है कि निजी कॉलेज स्वयं को विश्वविद्यालय में परिवर्तित कर लें और ऐसा नहीं कर पाने वाले छोटे संस्थान धीरे-धीरे बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएं? उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनेक ऐसे कॉलेज हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद वर्षों से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे संस्थानों की समस्याओं की अनदेखी करना उचित नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि यदि निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए स्थाई विन्यास निधि की बाध्यता समाप्त करना सरकार का सकारात्मक कदम है, तो इसी भावना के अनुरूप निजी कॉलेजों को भी राहत मिलनी चाहिए। एक ओर विश्वविद्यालयों के लिए वित्तीय बाध्यता समाप्त करना और दूसरी ओर कॉलेजों पर भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट का बोझ बनाए रखना समानता और कल्याणकारी राज्य की भावना के अनुरूप नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड शीघ्र ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर निजी कॉलेजों पर लागू सिक्योरिटी डिपॉजिट की बाध्यता समाप्त करने की मांग करेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत छोटे और पुराने संस्थानों की आर्थिक स्थिति तथा उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा का विकास केवल नए विश्वविद्यालय स्थापित करने से नहीं, बल्कि पहले से संचालित कॉलेजों को संरक्षण, सहयोग और समान अवसर उपलब्ध कराने से भी संभव है। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ पुराने कॉलेजों का अस्तित्व और विद्यार्थियों की शिक्षा भी सुरक्षित रह सके।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।